राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार द्वारा पारित तीन अहम कानूनों को आगे बढ़ाने की तैयारी कर चुकी है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई सचिव स्तर की बैठक में गिग वर्कर्स, मिनिमन इनकम गारंटी तथा राइट टू हेल्थ कानूनों को लेकर चर्चा हुई है। मुख्य सचिव ने पिछली सरकार के समय बने तीन कानूनों की समीक्षा कर इन्हें लागू करने के निर्देश भी दिए हैं। मुख्य सचिव ने कहा है कि गिग वर्कर्स के लिए बने कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए इसकी समीक्षा की जाए। वहीं मिनिमम गारंटी इनकम एक्ट के नियमो की भी फिर से समीक्षा की जाए। इसके लिए वित्त विभाग को कहा गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य के अधिकार कानून को लागू करने मे आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए मौजूदा नियमों की समीक्षा करने को भी कहा गया है। ऐसे में ये कानून जल्द लागू किए जाने की उम्मीद है। गौरतलब है कि ये तीनों कानून पिछली गहलोत सरकार के कार्यकाल में लाए गए थे। गौरतलब है कि राजस्थान में कांग्रेस लगातार भजनलाल सरकार पर यह आरोप लगाती आई है कि इस सरकार में समीक्षा के नाम पर उसकी योजनाओं का या तो नाम बदल दिया गया या फिर उन्हें बंद कर दिया गया है।
1. राजस्थान प्लेटफार्म आधारित गिग कर्मकार (रजिस्ट्रीकरण और कल्याण) विधेयक, 2023
यह बिल विधानसभा में पिछली गहलोत सरकार ने 21 जुलाई 2023 को विधानसभा में पेश किया था।
प्लेटफॉर्म आधारित कार्यकर्ताओं (गिग वर्कर्स) के लिए बनाए गए इस कानून का उद्देश्य उन्हें सामाजिक सुरक्षा, पंजीकरण और कल्याणकारी लाभ प्रदान करना है। गहलोत सरकार ने देश में पहली बार इस तरह का कानून पारित कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया था।
2. राजस्थान न्यूनतम आय गारंटी अधिनियम (Minimum Guaranteed Income Act) 2023
यह विधेयक पिछली सरकार के कार्यकाल में विधानसभा में 18 जुलाई को पेश हुआ था। इस कानून का उद्देश्य राज्य के कमजोर और वंचित वर्गों को न्यूनतम आय की गारंटी प्रदान करना है, जिससे गरीबी और असमानता को कम किया जा सके। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इस अधिनियम से जुड़े वित्तीय प्रावधानों की समीक्षा की जाए। इसके लिए वित्त विभाग को प्राथमिकता से नियमों को फिर से तैयार करने को कहा गया है।
3. स्वास्थ्य के अधिकार कानून (Right to Health Act) 2023
यह विधेयक पिछली सरकार में 22 सितंबर 2022 को सदन में पेश किया गया था। यह कानून हर नागरिक को सरकारी और निजी अस्पतालों से निःशुल्क और अनिवार्य स्वास्थ्य सेवाएं दिलाने की गारंटी देता है। इसके तहत कोई भी हॉस्पिटल जरुरतमंद मरीज का इलाज करने से मना नहीं कर सकता। इमरजेंसी के मरीजों का निजी अस्पतालों को फ्री में इलाज करने का प्रावधान भी इस कानून में है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कानून को लागू करने में आ रही वास्तविक समस्याओं की पहचान की जाए तथा मौजूदा नियमों में जरूरी संशोधन और स्पष्टता लाई जाए ताकि इसे व्यवहारिक रूप से लागू किया जा सके।