फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rajasthan News : सरकार के फैसले पर बढ़ा बवाल, राजकुमार रोत ने जताई कड़ी नाराजगी, सीकर में सीएम का पुतला फूंका

Sun, 29 Dec 2024 06:09 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

प्रदेश में पूर्ववर्ती गहलोत सरकार द्वारा अपने कार्यकाल के अंतिम समय में बनाए गए 17 नए जिलों में से नौ को खत्म करने और तीन संभागों को भी खत्म किए जाने के वर्तमान सरकार के फैसले के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जानिये मामला
विज्ञापन
राजस्थान - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजस्थान में भजनलाल सरकार द्वारा 9 जिलों और 3 संभागों को खत्म करने के फैसले ने सियासी हलचल मचा दी है। इस फैसले के तहत बांसवाड़ा संभाग को भी निरस्त कर दिया गया है, जिसे लेकर बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इसे आदिवासी बहुल क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय करार दिया है।

विज्ञापन


शनिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य के 17 नए जिलों में से 9 को खत्म करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही पाली, सीकर और बांसवाड़ा संभाग को भी समाप्त कर दिया गया। अब राजस्थान में कुल जिलों की संख्या घटकर 41 रह गई है, जबकि संभागों की संख्या 10 से घटकर 7 हो गई है।

जिन जिलों को खत्म किया गया है, उनमें दूदू, केकड़ी, शाहपुरा, नीमकाथाना, गंगापुर सिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, अनूपगढ़ और सांचौर शामिल हैं। वहीं बालोतरा, ब्यावर, डीडवाना-कुचामन, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, फलौदी और सलूम्बर को यथावत रखा गया है।
विज्ञापन


इधर बांसवाड़ा संभाग को निरस्त करने पर सांसद राजकुमार रोत ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह फैसला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की जनता के लिए अन्यायपूर्ण है। रोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, बांसवाड़ा संभाग को निरस्त करके राज्य सरकार ने बांसवाड़ा-डूंगरपुर की जनता के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया है। मध्यप्रदेश और गुजरात की सीमा पर रहने वाला एक गरीब आदिवासी 240 किलोमीटर की दूरी तय कर उदयपुर आने की सोच भी नहीं सकता।


उन्होंने भजनलाल सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि बांसवाड़ा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में संभाग को खत्म करने से सरकारी सेवाओं तक पहुंच और प्रशासनिक कार्यों में कठिनाई बढ़ेगी। इस क्षेत्र के लोग लंबे समय से बेहतर प्रशासनिक सुविधाओं की मांग कर रहे थे, लेकिन संभाग को खत्म करना उनकी समस्याओं को और बढ़ा सकता है।

भजनलाल सरकार के इस कदम के बाद विपक्षी दल कांग्रेस और अन्य आदिवासी संगठनों ने भी विरोध तेज कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस फैसले से सरकार की नीतियों में आदिवासियों के प्रति उदासीनता स्पष्ट होती है।

इधर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे लेकर सरकार पर हमला बोला। जूली ने कहा कि इसी वर्ष अगस्त में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लद्दाख जैसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश में 5 नए छोटे जिलों की घोषणा की थी। जबकि, राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है, वहां भाजपा की सरकार ने 9 जिलों को समाप्त कर दिया। यह फैसला निंदनीय और जनविरोधी है। कांग्रेस पार्टी इस निर्णय का कड़ा विरोध करती है और आने वाले दिनों में सदन से लेकर सड़क तक आंदोलन करेगी।

सीकर में भी सरकार के इस फैसले को लेकर विरोध शुरू हो गया है। माकपा नेता भागीरथ नेतड़ ने बताया कि शेखावाटी में भाजपा हमेशा ही कमजोर रही है, विधानसभा चुनाव में यहां से सिर्फ तीन ही विधायक जीत हासिल कर सके और लोकसभा के चुनाव में इंडिया गठबंधन के अमराराम सांसद चुने गए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जहां भाजपा कमजोर रही है, वहां उस क्षेत्र के साथ उसका दुर्भावनापूर्ण व्यवहार रहा है। इसी बात को लेकर सीकर संभाग और नीमकाथाना जिला निरस्त किया है। उन्होंने कहा कि आज हमने सरकार के इस फैसले के विरोध में मुख्यमंत्री का पुतला फूंककर विरोध जताया है और सरकार से मांग रखी है कि सरकार जिलों और संभागों को निरस्त करने का फैसला वापस ले। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार अपना फैसला वापस नही लेती है तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें