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Rajasthan News: हाईकोर्ट का सख्त फैसला, रिश्ता टूटने पर सहमति से बने संबंध को नहीं बता सकते दुष्कर्म

Fri, 08 May 2026 10:08 AM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बने प्रेम संबंधों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि संबंध टूटने के बाद सहमति से बने रिश्ते को दुष्कर्म या अपहरण का मामला नहीं बनाया जा सकता।
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राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजस्थान हाईकोर्ट ने सहमति से बने प्रेम संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बने संबंध को बाद में दुष्कर्म या अपहरण का मामला नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि असफल प्रेम संबंधों को आपराधिक मुकदमों में बदलना कानून और न्याय व्यवस्था का दुरुपयोग है।

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मामला सिरोही जिले के बारलूट थाना क्षेत्र का था, जहां एक युवती ने अपने प्रेमी जगदीश और उसके परिवार के खिलाफ आईपीसी की धारा 344, 366, 376, 376(2)(n) और 120B के तहत मामला दर्ज कराया था। आरोप था कि युवती का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया गया।

आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रियंका बोराना ने हाईकोर्ट में दलील दी कि दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे और दोनों बालिग थे। युवती अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी। अदालत के समक्ष विवाह प्रमाण पत्र, शपथ पत्र, पुलिस बयान और अन्य दस्तावेज भी पेश किए गए, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि दोनों ने आर्य समाज मंदिर में विवाह भी किया था।
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सुनवाई के दौरान जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और युवती के पूर्व बयानों का परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि युवती ने 14 फरवरी और 1 अप्रैल 2023 को पुलिस के समक्ष दिए गए बयानों में स्वयं कहा था कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी। कहीं भी दबाव, अपहरण या जबरदस्ती का उल्लेख नहीं था।

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि दो वयस्क अपनी इच्छा से संबंध स्थापित करते हैं और बाद में संबंध टूट जाता है, तो केवल उसी आधार पर दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप नहीं लगाए जा सकते। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आपराधिक कानून का उपयोग व्यक्तिगत प्रतिशोध या सामाजिक दबाव के साधन के रूप में नहीं होना चाहिए।
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अदालत ने यह भी माना कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेज एफआईआर के आरोपों को कमजोर करते हैं। कोर्ट ने माना कि एफआईआर संभवतः पारिवारिक दबाव या बाद की परिस्थितियों में दर्ज कराई गई। अंततः हाईकोर्ट ने बारलूट थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 111/2023 और उससे जुड़ी सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द करते हुए आरोपी जगदीश को राहत प्रदान की है।

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