लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाजपा और संघ द्वारा संस्थानों पर कब्जा किए जाने और भारतीय राज व्यवस्था से लड़ाई संबंधी बयान पर राजस्थान में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। कांग्रेस ने राहुल के बयान को सही ठहराते हुए कहा है कि ये हालात के प्रति जनता को चेताने वाला है। भाजपा-आरएसएस का प्रयास है कि वह देश के संस्थानों पर कब्जा कर ले। इधर भाजपा ने कहा है कि राहुल के बयान से यह उजागर हो गया है कि उनकी निष्ठा भारत के नहीं बल्कि अपने ननिहाल के प्रति है।
पक्षपातपूर्ण कार्यशैली से चिंतित देश- गहलोत
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में कहा कि भाजपा और आरएसएस का प्रयास रहा है कि वह देश के तमाम संस्थानों पर दबाव बनाकर उन्हें अपने कब्जे में कर ले। आज ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स, दिल्ली पुलिस समेत तमाम केन्द्रीय एजेंसियां तथा चुनाव आयोग जैसे स्वतंत्र संगठन भी सरकार के इशारे पर ही काम कर रहे हैं। इसी सरकार के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों तक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि न्यायपालिका पर दबाव है। पूरा देश इन संस्थानों की पक्षपातपूर्ण कार्यशैली को लेकर चिंतित है। राहुल गांधी का इसी परिप्रेक्ष्य में दिया गया बयान उचित है। कल सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि ईडी की मंशा केवल लोगों को आरोपी बनाकर जेल में बंद रखने की है। इससे स्पष्ट है कि ईडी का इस्तेमाल केन्द्र सरकार जनता को डराने के लिए कर रही है।
दादी से सीख लें राहुल- राठौड़
इधर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राहुल या तो शब्दों का चयन नहीं कर पाते या इस बयान के जारिए उनके अंतरमन का भाव सामने आ गया है। राहुल की निष्ठा भारत के प्रति नहीं बल्कि कहीं और है। लोग पहले आरोप लगाते थे कि उनकी निष्ठा अपने ननिहाल के प्रति है। इस बयान से ऐसा उजागर भी हो गया। ये वफादारी की शब्दावली नहीं है। इसे राष्ट्रीय चरित्र नहीं माना जा सकता। आज देश का नेतृत्व ऐसा है, जो देश को उच्चतम स्तर तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। कोई राजनीतिक विरोध कर सकता है लेकिन ऐसा बयान ठीक नहीं है। एक सवाल पर राठौड़ ने कहा कि राहुल अपनी दादी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से सीख लें। एक बार जीप घोटाले में जब उन्हें गिरफ्तार किया गया और विदेशों में जब उनसे इस बारे में सवाल किए गए तो उन्होंने कहा- भारत की बात भारत में ही करूंगी।