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Rajasthan: सांसद राजकुमार रोत बोले- मां बाड़ी केंद्रों से आदिवासी बच्चों का हो रहा पलायन, हम आंदोलन करेंगे

Wed, 15 Jan 2025 06:31 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

सांसद राजकुमार रोत ने राजस्थान के वागड़ इलाके डूंगरपुर-बांसवाड़ा में मां बाड़ी केंद्रों पर बच्चों के नामांकन में भारी कमी को लेकर भजनलाल सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने क्षेत्रीय जनजाति विकास विभाग पर आरोप लगाए हैं।
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सांसद राजकुमार रोत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीते दिन सांसद राजकुमार रोत द्वारा कई मां बाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान बच्चों ने बताया, तीन-चार महीने से न अल्पाहार, न भोजन और न ही अन्य सामग्री मिल रही है। शिक्षाकर्मियों की पीड़ा है कि बच्चों को कैसे ठहराएं। केंद्रों पर न अल्पाहार, न भोजन, न जूते- चप्पल और न ही स्वेटर मिल रहे हैं।

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कई शिक्षाकर्मियों ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा, मां बाड़ी केंद्र खोलकर बैठे रहते हैं। सुविधा नहीं होने से बच्चे नहीं आ रहे हैं। बच्चों के अभिभावक भोजन और अल्पाहार नहीं देने का दोष शिक्षाकर्मी पर डाल रहे हैं। शिक्षाकर्मी द्वारा भोजन खा खाने का आरोप लगाया जा रहा है। न  समय पर तनख्वाह और न बच्चों के लिए सुविधा तो आखिर कैसे चलाएं केंद्र। ये बात अधिकारियों को बताते हैं तो चुप्पी साधने को कहा जाता है और हटाने की धमकी देते हैं।

खबर पढ़कर सांसद को मिली जानकारी
कुछ दिन पहले प्रकाशित खबर को पढ़कर सांसद राजकुमार रोत मां बाड़ी केंद्रों पर पहुंचे। यहां गंभीर अनियमितता और विभाग का नंगा नाच सामने आया। मासूम बच्चे बोले, पहले सब मिलता था। अब सब बंद हो गया है। घर से टिफिन लाएं या भूखे रहने को मजबूर रहें। इसलिए मां बाड़ी केंद्रों पर नहीं आते।
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ये हैं विभाग के नियम

  • सुबह अल्पाहार
  • दोपहर का भोजन
  • डे केयर है तो दो वक़्त अल्पाहार और दो वक्त भोजन
  • साप्ताहिक फल फ्रूट
  • साप्ताहिक मिठाई
  • कपड़े, स्वेटर, सूज और समस्त स्टेशनरी की सामग्री
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मां बाड़ी केंद्र - फोटो : अमर उजाला
'आदिवासी बच्चों का भविष्य अंधकार में डाला जा रहा'
राजकुमार रोत ने कहा, अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को पहले जो सुविधाएं और भोजन मिल रहा था, वह अब बंद हो गया है। शिक्षाकर्मी बच्चों को बुलाने की कोशिश करते हैं, लेकिन सामग्री और सुविधाओं के अभाव में बच्चे केंद्रों में टिक नहीं पा रहे हैं। इस बीच, यह भी जानकारी मिली है कि अधिकारियों के भ्रष्टाचार और निजी स्वार्थ के कारण प्रक्रियाओं में देरी हो रही है, जिससे आदिवासी बच्चों का भविष्य अंधकार में डाला जा रहा है।
 

'करेंगे बड़ा आंदोलन' 
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप का नहीं है, बल्कि सच्चाई यह है कि टीडी विभाग में भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है। आदिवासी बच्चों के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त करने के लिए तुरंत कदम उठाए जाने चाहिए। यदि जल्द ही मां बाड़ी केंद्रों पर सुविधाओं का वितरण शुरू नहीं हुआ, तो हमारी पार्टी बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
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