राजस्थान में महिला सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए राजस्थान पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले पुलिस ने तकनीक आधारित विशेष अभियान की शुरुआत की है। यह पहल पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर प्रदेशभर में लागू की जा रही है।
इस अभियान के तहत सार्वजनिक परिवहन-बस, ऑटो और टैक्सी में राजकॉप सिटीजन एप के क्यूआर कोड वाले पोस्टर लगाए जा रहे हैं। अब यात्रा के दौरान महिलाएं केवल एक स्कैन के जरिए सीधे पुलिस सहायता तक पहुंच सकेंगी।
एप में उपलब्ध Need Help फीचर संकट की स्थिति में तुरंत कंट्रोल रूम को लोकेशन भेजेगा, जिससे पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी। खास तौर पर छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को इस सुविधा से अतिरिक्त सुरक्षा कवच मिलने की उम्मीद है। यातायात पुलिस द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में इस संबंध में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, तकनीक के माध्यम से महिला सुरक्षा तंत्र को जमीनी स्तर तक मजबूत करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
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महिला अपराधों की स्थिति
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान महिला अपराधों के मामलों में देश के टॉप तीन राज्यों में शामिल रहा था, वहीं राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष के शुरुआती छह महीनों में राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़े इस प्रकार रहे-
प्रदेश में 1 जनवरी से 30 जून 2025 के बीच महिलाओं से जुड़े अपराधों के कुल 9,393 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जारी आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में बलात्कार, दहेज हत्या, आत्महत्या के दुष्प्रेरण और दहेज उत्पीड़न जैसे मामलों में बड़ी संख्या में केस सामने आए हैं। आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं के साथ बलात्कार के 2,966 मामले दर्ज हुए। इनमें से 1,387 मामलों में चालान पेश किया गया, 1,187 मामलों में एफआर पेश की गई, जबकि 392 प्रकरण अभी लंबित हैं।
बलात्कार के बाद हत्या के 12 मामले दर्ज हुए, जिनमें 8 मामलों में चालान और 3 में एफआर पेश की गई है। दहेज हत्या के 187 प्रकरण दर्ज हुए। इनमें 92 में चालान, 31 में एफआर पेश की गई। आत्महत्या के दुष्प्रेरण के 36 मामलों में 7 में चालान और 5 में एफआर पेश की गई। सबसे अधिक मामले दहेज उत्पीड़न के सामने आए, जिनकी संख्या 6,192 रही। इनमें 3,004 मामलों में चालान, 1,863 में एफआर पेश की गई।