लोकसभा चुनाव में भाजपा ने गंवाई जाट और मीणा बेल्ट।
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राजस्थान में चुनावों के जो रुझान नजर आ रहे हैं वो इस बात की ओर साफ इशारा कर रहे हैं कि यहां की स्टेट लीडरशिप पूरी तरह फेल हो गई। यहां की जाट और एसटी बेल्ट में भाजपा बुरी तरह से हारती नजर आ रही है। चूरू, सीकर, झुंझुनू, नागौर और बाड़मेर में भाजपा बहुत पीछे है। वहीं एसटी सीट दौसा और बांसवाड़ा भी हारती नजर आ रही है।
गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने चूरू तीन लाख 34 हजार, झुंझुनू 3 लाख 25 हजार, सीकर 2 लाख 97 हजार, बाड़मेर 3 लाख 23 हजार और नागौर एक लाख 81 हजार के बड़े अंतर से जीती थीं। वहीं, एसटी सीट दौसा 78 हजार और बांसवाड़ा करीब तीन लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीती थी।
वोट ट्रांसफर में कांग्रेस पास, भाजपा फेल
चुनावों के रुझानों से एक बात और साफ नजर आ रही है कि कांग्रेस ने सीकर, बांसवाड़ा और नागौर के लिए जो गठबंधन किया था वो पूरी तरह से सफल रहा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कहना कि इसे कांग्रेस की सबसे बड़ी सफलता कह सकते हैं कि एलायंस सीट पर कांग्रेस का वोट एलायंस पार्टनर को पूरी तरह से हुआ। वहीं, भाजपा इस मामले में फेल साबित हुई। भाजपा ने कांग्रेस के बांसवाड़ा में कांग्रेस के महेंद्रजीत मालवीय को तोड़कर अपना प्रत्याशी बनाया, लेकिन वे हारते नजर आ रहे हैं। इसी तरह नागौर में भी ज्योति मिर्धा को विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से तोड़कर भाजपा में शामिल किया गया। वे विधानसभा चुनाव भी हारीं और अब लोकसभा चुनाव में भी पिछड़ती नजर आ रही हैं।
आरक्षण का मुद्दा असर कर गया
राजस्थान के रुझानों को देखते हुए यह साफ नजर आ रहा है कि आरक्षण से छेड़छाड़ का मुद्दा कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हुआ। यहां 4 एससी और तीन एसटी सीटों में से भाजपा के खाते में सिर्फ दो सीटें जाती दिख रही हैं।
जाट-मीणा की नाराजगी, कम करने के लिए कुछ नहीं किया
विधानसभा चुनावों के बाद मंत्रिमंडल में जाट और मीणा नेताओं को कम तरजीह मिली। वहीं सरकार बनने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हुए तबादलों को लेकर कुछ जातियों को टारगेट करने के मामले सोशल मीडिया पर सामने आए। इसे लेकर जाटों और मीणाओं में खासी नाराजगी भी थी, लेकिन सरकार के स्तर पर इस डैमेज को कंट्रोल करने के लिए कुछ नहीं किया गया।