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राजस्थान: शिखर अग्रवाल से पहले ये अफसर भी हो चुके हैं एपीओ, जानें वजह

Thu, 29 Oct 2026 03:06 PM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान में शिखर अग्रवाल से पहले नलिनी कठोतिया, अंबरीश कुमार, ललित गोयल, अर्चना सिंह और हनुमानमल ढाका समेत कई अधिकारियों को अलग-अलग मामलों में एपीओ किया गया था।

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राजस्थान सचिवालय - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजस्थान में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल से जुड़े विवाद के बीच भजनलाल शर्मा सरकार में पहले भी कई अधिकारियों को एपीओ किया जा चुका है। इनमें जेडीए की तत्कालीन सचिव नलिनी कठोतिया, खाद्य विभाग के सचिव अंबरीश कुमार, भीलवाड़ा यूआईटी के सचिव ललित गोयल, आईएएस अर्चना सिंह, कोटा के संभागीय आयुक्त राजेंद्र विजय और दूदू के तत्कालीन कलेक्टर हनुमानमल ढाका  शामिल हैं। इन अधिकारियों को अलग-अलग मामलों में पद से हटाकर पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा में रखा गया था।

नलिनी कठोतिया: जेडीए में निरीक्षण के बाद कार्रवाई

आईएएस अधिकारी नलिनी कठोतिया को जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के सचिव पद से एपीओ किया गया था। मुख्य सचिव सुधांश पंत के जेडीए कार्यालय के औचक निरीक्षण के दौरान कठोतिया कार्यालय में मौजूद नहीं मिली थीं। निरीक्षण में अधिकारियों के समय पर कार्यालय नहीं पहुंचने और कामकाज में लापरवाही की बात भी सामने आई थी।

इसके अलावा जेडीए में धारा 90ए के मामलों, अवैध निर्माण और अतिक्रमण से जुड़े प्रकरणों में ऑनलाइन लंबित काम की संख्या अधिक पाई गई थी। लैंड टू लैंड पॉलिसी के क्रियान्वयन से जुड़े मामलों और अनियमितताओं की शिकायतों के बीच यह कार्रवाई हुई थी। 

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अंबरीश कुमार: बिना मंजूरी विदेश जाने पर कार्रवाई

खाद्य विभाग के सचिव अंबरीश कुमार को सरकार की मंजूरी के बिना विदेश यात्रा पर जाने के मामले में एपीओ किया गया। बताया गया कि उन्होंने विदेश जाने की अनुमति के लिए कार्मिक विभाग में आवेदन किया था, लेकिन उच्च स्तर से मंजूरी नहीं मिली थी। इसके बावजूद वह निजी काम से विदेश चले गए।

सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को विदेश यात्रा के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेनी होती है। बिना मंजूरी विदेश जाने पर सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। उनकी जगह अक्षय ऊर्जा निगम के सीएमडी डॉ. रोहित गुप्ता को खाद्य विभाग के सचिव का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया।

अंबरीश कुमार इससे पहले मई में भी विवादों में आए थे। पांच मई को खाद्य विभाग से जुड़े मुद्दों पर आयोजित एक वर्कशॉप में अधिकारियों और कर्मचारियों को ईशा फाउंडेशन और लैंडमार्क फोरम से जुड़ने के लिए कहा गया था। बैठक में इन संस्थाओं के चार हजार से 26 हजार रुपये तक के कोर्स के सत्रों में शामिल होने के निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई थी। वर्कशॉप में खाद्य विभाग के करीब 300 से अधिक अधिकारी मौजूद थे।

ललित गोयल: जमीन आवंटन में अनियमितताओं के आरोप

आईएएस ललित गोयल को मई 2026 में भीलवाड़ा नगर विकास न्यास (यूआईटी) के सचिव पद से हटाकर एपीओ किया गया था। यह कार्रवाई नेहरू विहार प्रोजेक्ट में जमीन आवंटन से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में हुई थी।

आरोप था कि परियोजना में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी फ्लैट बनाने वाली फर्म को नियमों के अनुसार मिलने वाली 25 प्रतिशत जमीन उसके बजाय दूसरे शेयरधारक को आवंटित कर दी गई। इस मामले में करीब 4,320 वर्ग मीटर अतिरिक्त जमीन दिए जाने और इससे करोड़ों रुपये के वित्तीय नुकसान की आशंका जताई गई थी।

इसके अलावा यूआईटी में लॉटरी व्यवस्था, भूखंड आवंटन और जमीन के डायवर्जन से जुड़ी शिकायतें भी सामने आई थीं। इन मामलों के बाद कार्मिक विभाग ने तीन मई 2026 को रविवार के दिन आदेश जारी कर गोयल को तत्काल प्रभाव से एपीओ कर दिया था।

अर्चना सिंह: प्रधानमंत्री की सभा में स्क्रीन बंद होने पर कार्रवाई

आईएएस अधिकारी अर्चना सिंह को सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बांसवाड़ा के नपला में हुई जनसभा के दौरान तकनीकी गड़बड़ी के मामले में एपीओ किया गया था।

25 सितंबर 2025 को आयोजित जनसभा और किसानों से संवाद के दौरान करीब दस मिनट तक वीडियो स्क्रीन खाली रही थी, जबकि ऑडियो चालू था। कार्यक्रम के तकनीकी संचालन और वीडियो प्रसारण की जिम्मेदारी सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (DoIT) के पास थी। उस समय अर्चना सिंह विभाग की सचिव थीं।

वीवीआईपी कार्यक्रम में हुई इस तकनीकी गड़बड़ी और प्रशासनिक लापरवाही को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार ने उन्हें सचिव पद से हटाकर एपीओ कर दिया था।

हनुमानमल ढाका: भू रूपांतरण के बदले रिश्वत मांगने का आरोप

दूदू के तत्कालीन कलेक्टर हनुमानमल ढाका को जमीन के भू रूपांतरण के बदले 25 लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में वर्ष 2024 में एपीओ किया गया था। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने ढाका और पटवारी हंसराज के खिलाफ कार्रवाई की थी।

एसीबी ने दोनों की संपत्ति, बैंक खातों और लॉकरों की जांच शुरू की। वहीं, दूदू तहसील में जमीनों के भू रूपांतरण से जुड़ी फाइलों की जांच भी शुरू की गई। जयपुर एसीबी की टीम ने तहसील पहुंचकर एक बंद कमरे को खुलवाया और फाइलों की जांच की।

राजेंद्र विजय : एसीबी के छापों के बाद किया एपीओ

आईएएस अधिकारी राजेंद्र विजय को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की ओर से आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग के मामले में केस दर्ज किए जाने के बाद एपीओ किया गया। एसीबी ने उनके खिलाफ सर्च वारंट के साथ कोटा में चार ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के बाद कोटा संभागीय आयुक्त का अतिरिक्त कार्यभार जिला कलेक्टर रविंद्र गोस्वामी को सौंपा गया।

एपीओ का मतलब क्या है?

एपीओ (Awaiting Posting Orders) का अर्थ है कि अधिकारी को मौजूदा पद से हटाकर नई पोस्टिंग के आदेश आने तक प्रतीक्षा में रखा गया है। यह अपने आप में किसी आरोप में दोषी ठहराए जाने का फैसला नहीं है।

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