राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर स्थित नीरजा मोदी स्कूल के छात्रों के स्थानांतरण पर शुक्रवार को रोक लगा दी। यह अंतरिम राहत उस याचिका पर दी गई है, जिसमें स्कूल ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा एक कक्षा चार के छात्र की मौत के बाद दी गई संबद्धता समाप्त करने के आदेश को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति बिपिन गुप्ता ने स्कूल को निर्देश दिया कि वह 30 दिसंबर 2025 को जारी CBSE के संबद्धता समाप्त करने के आदेश पर पुनर्विचार के लिए बोर्ड के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए एक प्रतिनिधित्व (representation) प्रस्तुत करे। साथ ही, अदालत ने छात्रों को अन्य स्कूलों में तत्काल स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
छात्रों के हितों की रक्षा का भरोसा
स्कूल की ओर से पेश अधिवक्ता रचित शर्मा ने सुनवाई के बाद बताया कि हाईकोर्ट ने CBSE से पुनर्विचार होने तक छात्रों के स्थानांतरण पर रोक लगाई है। उन्होंने कहा कि स्कूल ने अदालत को आश्वासन दिया है कि वह सभी छात्रों के शैक्षणिक हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह मामला स्कूल में कक्षा चार के एक छात्र की मौत से जुड़ा है, जिसके बाद CBSE ने अपने नियामक प्रावधानों के तहत नीरजा मोदी स्कूल की संबद्धता समाप्त करने का आदेश पारित किया था।
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याचिका में उठाए गए गंभीर मुद्दे
स्कूल प्रबंधन ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में तर्क दिया कि CBSE का यह फैसला हजारों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करेगा और इससे शैक्षणिक व्यवस्था में गंभीर व्यवधान उत्पन्न होगा। इसी आधार पर स्कूल ने अंतरिम संरक्षण की मांग की थी। फिलहाल यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित है। अंतरिम आदेश से स्कूल और छात्रों को अस्थायी राहत मिली है। यह राहत उस छात्र के लिए भी अहम मानी जा रही है, जो CBSE के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा था।