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एसबीआई रिश्वत मामला: हाईकोर्ट सख्त, बैंक अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच के निर्देश

Fri, 16 Oct 2026 11:36 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने एसबीआई के अधिकारियों पर रिश्वत मांगने के आरोपों के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने विवेक शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपों की पुष्टि और ट्रैप कार्रवाई के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं करने पर एसीबी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
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राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान हाईकोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के अधिकारियों पर रिश्वत मांगने के आरोपों के मामले में बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को संबंधित बैंक अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि और ट्रैप कार्रवाई के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं करने पर एसीबी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने विवेक शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपों की पुष्टि होने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं करना गंभीर मामला है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि एसीबी ने आरोपी अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने विवेक शर्मा के खिलाफ एसीबी में दर्ज झूठी शिकायत से जुड़े परिवाद को भी निरस्त कर दिया।

51 लाख रुपये के फर्जी हाउसिंग लोन का खुलासा करने के बाद शुरू हुआ विवाद

यह मामला एसबीआई की भिवाड़ी शाखा से जुड़ा है, जहां विवेक शर्मा मुख्य प्रबंधक के पद पर तैनात थे। उन्होंने शाखा में काम करने के दौरान 51 लाख रुपये के फर्जी हाउसिंग लोन से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया था। इस फर्जीवाड़े को सामने लाने के बाद बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इसके बाद उनके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज करा दिया गया। आरोप है कि इस मामले में विवेक शर्मा के खिलाफ लगे आरोपों को खत्म करने के बदले बैंक अधिकारियों ने उनसे 40 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। प्रताड़ना से परेशान होकर विवेक शर्मा ने नवंबर 2022 में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी।

रिश्वत की मांग का सत्यापन और ट्रैप के बाद भी दर्ज नहीं हुई एफआईआर

विवेक शर्मा की शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने रिश्वत मांगने के आरोपों का सत्यापन किया। इसके बाद जाल बिछाकर ट्रैप की कार्रवाई की गई, जिसके दौरान रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई। इसके बावजूद, नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर नियमित जांच शुरू करने के बजाय एसीबी के महानिदेशक ने केवल प्रारंभिक शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया। आरोप है कि एसीबी ने मामले में नियमित जांच शुरू करने के बजाय इसे बंद करने का प्रयास किया। साथ ही, रिश्वत मांगने के आरोपी बैंक अधिकारियों को आरोपों से मुक्त कर दिया गया और शिकायतकर्ता विवेक शर्मा के खिलाफ ही कार्रवाई शुरू कर दी गई। इसी घटनाक्रम को लेकर विवेक शर्मा ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

उप महाप्रबंधक और मुख्य प्रबंधक-एचआर के खिलाफ एफआईआर के आदेश

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने एसीबी की कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने रखा। मामले के तथ्यों का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने बैंक के उप महाप्रबंधक और मुख्य प्रबंधक-एचआर के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिश्वत की मांग की पुष्टि होने और ट्रैप कार्रवाई के दौरान रकम बरामद होने के बावजूद मामले को बंद करने का प्रयास अनुचित था। हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने को गंभीर मानते हुए एसीबी की भूमिका पर सवाल उठाए। साथ ही, विवेक शर्मा के खिलाफ दर्ज झूठी शिकायत से जुड़े परिवाद को भी निरस्त कर दिया। अब अदालत के आदेश के बाद संबंधित बैंक अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच की जानी है।

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