राजस्थान हाईकोर्ट ने नई लिटिगेशन पॉलिसी लागू करने में देरी पर राज्य सरकार को पांच हफ्ते का अंतिम समय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि तय समय में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो अगली सुनवाई पर मुख्य सचिव, प्रमुख विधि सचिव और वित्त सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर देरी का कारण बताना होगा। वहीं, एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने जयपुर के त्रिपोलिया बाजार स्थित 277 साल पुराने श्रीरघुनाथजी मंदिर को ध्वस्त कर वहां व्यावसायिक परिसर बनाए जाने के मामले में राज्य सरकार और जयपुर नगर निगम से जवाब मांगा है। अदालत ने मंदिर के मूल स्वरूप और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े आरोपों पर अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया है।
नई लिटिगेशन पॉलिसी पर सरकार को अंतिम चेतावनी
राज्य सरकार की आपराधिक अपीलों पर सुनवाई के दौरान जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने नई लिटिगेशन पॉलिसी को लेकर यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने अदालती आदेश की पालना के लिए पांच सप्ताह का समय मांगा था।
277 साल पुराने श्रीरघुनाथजी मंदिर के मामले में नोटिस
एक अन्य मामले में हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने जयपुर के त्रिपोलिया बाजार स्थित 277 वर्ष पुराने श्रीरघुनाथजी मंदिर को ध्वस्त किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। यह याचिका किशोर कुमार अग्रवाल की ओर से दाखिल की गई है।
मंदिर की ऐतिहासिक दीवार सुरक्षित रखने समेत कई शर्तें थीं
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विमल चौधरी ने अदालत को बताया कि श्रीजी की मोरी में करीब 7,648 वर्ग फीट क्षेत्र में फैले इस ऐतिहासिक मंदिर के मूल स्वरूप को नष्ट कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि जयपुर नगर निगम की एम्पावर्ड कमेटी ने 14 अक्तूबर 2022 को निर्णय लिया था। इसके बाद 28 अगस्त 2023 को निर्माण की अनुमति जारी की गई थी। इस अनुमति में कुछ शर्तें तय की गई थीं। इनके तहत मंदिर की ऐतिहासिक दीवार को सुरक्षित रखना, मंदिर को खुला रखना और वहां किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधि नहीं चलाना शामिल था।
दुकानें और बेसमेंट बनाने का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि निर्माण की अनुमति में तय शर्तों का उल्लंघन किया गया। मंदिर परिसर में दुकानें, बेसमेंट और व्यावसायिक परिसर बना दिए गए। इससे जंतर-मंतर, सिटी पैलेस और त्रिपोलिया बाजार की ऐतिहासिक दृश्य अखंडता प्रभावित हुई है।
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि नियमों के विरुद्ध किए गए निर्माण को ध्वस्त कर परिसर को सील किया जाए। इसके साथ ही मंदिर की मूर्तियों को दोबारा स्थापित करने की भी मांग की गई है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और जयपुर नगर निगम से जवाब तलब किया है। अब अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि निर्माण अनुमति की शर्तों का पालन हुआ या नहीं और ऐतिहासिक मंदिर के मूल स्वरूप में बदलाव को लेकर क्या कार्रवाई की गई।