राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए पांच न्यायाधीशों की स्क्रीनिंग कमेटी गठित की है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल की स्वीकृति से गठित इस समिति के दायरे में जिला न्यायाधीश से लेकर सीनियर सिविल जज और सिविल जज संवर्ग तक के अधिकारी आएंगे। पहले गठित उच्च न्यायपालिका और अधीनस्थ न्यायपालिका समितियों को सौंपे गए मामले भी अब नई कमेटी के विचारार्थ रखे जाएंगे।
पांच न्यायाधीशों को मिली जिम्मेदारी
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी आदेश के अनुसार, स्क्रीनिंग कमेटी राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के नियम 53(1) के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों की जांच करेगी।
कमेटी में हाईकोर्ट के पांच न्यायाधीश शामिल-
- जस्टिस विनीत कुमार माथुर
- जस्टिस इंद्रजीत सिंह
- जस्टिस अनूप कुमार ढंड
- जस्टिस समीर जैन
- जस्टिस आशुतोष कुमार
समिति संबंधित न्यायिक अधिकारियों के मामलों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत समीक्षा करेगी।
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पहले गठित समितियों के मामले भी आएंगे दायरे में
आदेश का अहम पहलू यह है कि 26 सितंबर 2026 के आदेश के तहत उच्च न्यायपालिका समिति और अधीनस्थ न्यायपालिका समिति को सौंपे गए अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामले भी अब नई स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष विचार के लिए रखे जाएंगे। इस तरह जिला न्यायाधीश संवर्ग के साथ सीनियर सिविल जज और सिविल जज संवर्ग के अधिकारियों से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए नई समिति को जिम्मेदारी दी गई है।
पेंशन नियमों के तहत होगी समीक्षा
राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 का नियम 53(1) अनिवार्य सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए लागू प्रावधानों में शामिल है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, नई कमेटी इसी नियम के तहत संबंधित मामलों की जांच करेगी।
फिलहाल, कमेटी के गठन और पहले गठित दोनों समितियों को सौंपे गए मामलों को नई समिति के विचारार्थ रखने का आदेश जारी किया गया है। संबंधित मामलों पर आगे की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार होगी।