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राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शिक्षिका को मिलेगा 180 दिन का मातृत्व अवकाश, पूरा वेतन भी देगी सरकार

Wed, 21 Oct 2026 02:26 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रसव के बाद नए स्कूल में कार्यभार संभालने वाली शिक्षिका को 180 दिन का पूरा मातृत्व अवकाश देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढांड की एकल पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शिक्षिका को 1 सितंबर 2023 से मातृत्व अवकाश का लाभ, इस अवधि का पूरा वेतन और नियमानुसार अन्य लाभ दिए जाएं।
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राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रसव के बाद नए स्कूल में कार्यभार संभालने वाली एक शिक्षिका को 180 दिन का पूरा मातृत्व अवकाश देने का आदेश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शिक्षिका को 1 सितंबर 2023 से मातृत्व अवकाश का लाभ दिया जाए। साथ ही, इस अवधि का पूरा वेतन और नियमानुसार मिलने वाले अन्य लाभ भी दिए जाएं। अदालत ने साफ कहा कि मातृत्व अवकाश केवल सरकारी नियमों से जुड़ी सुविधा नहीं है, बल्कि यह मां और बच्चे के अधिकारों से भी जुड़ा मामला है। न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढांड की एकल पीठ ने राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 103 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला बाड़मेर जिले में तैनात एक शिक्षिका से जुड़ा है। जब वह वहां के एक स्कूल में कार्यरत थीं, तब गर्भवती हुईं। उस समय उन्होंने 34 दिन के मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था, जिसे संबंधित अधिकारियों ने मंजूरी दे दी थी। इसके बाद शिक्षिका ने सितंबर 2023 में बच्चे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद शिक्षिका ने 6 अक्तूबर 2023 को खैरथल-तिजारा जिले के एक नए स्कूल में कार्यभार संभाल लिया। इसके बाद उन्होंने प्रशासन से पूरे 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने की मांग की। हालांकि, अधिकारियों ने उनके आवेदन पर कोई फैसला नहीं लिया और मामला लंबित रखा।

मातृत्व अवकाश नहीं मिला तो तीन बार मांगी छुट्टी

मातृत्व अवकाश नहीं मिलने के कारण शिक्षिका को अपने बच्चे की देखभाल के लिए तीन अलग-अलग बार बाल देखभाल अवकाश यानी चाइल्ड केयर लीव के लिए आवेदन करना पड़ा। अधिकारियों ने उनके इन आवेदनों को मंजूरी दे दी, लेकिन मातृत्व अवकाश की पूरी अवधि और उसके वेतन के भुगतान को लेकर विवाद बना रहा। शिक्षिका का मामला लंबित रहने और अपने अधिकारों का लाभ नहीं मिलने पर उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित सेवा नियमों और मातृत्व अवकाश के उद्देश्य पर विचार किया।

मातृत्व अवकाश महिला और बच्चे का अधिकार: हाईकोर्ट

न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढांड ने राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 103 का विश्लेषण करते हुए कहा कि नियमों के तहत महिला सरकारी कर्मचारी को अपने पूरे सेवाकाल में दो बार 180 दिन का मातृत्व अवकाश लेने का स्पष्ट अधिकार है। अदालत ने कहा कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य केवल मां और नवजात बच्चे के स्वास्थ्य की देखभाल करना नहीं है। इससे मां और बच्चे को एक-दूसरे के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने का समय भी मिलता है। हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का जिक्र करते हुए कहा कि जीवन का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है। इसमें मातृत्व का अधिकार और बच्चे के संपूर्ण विकास का अधिकार भी शामिल है। अदालत के अनुसार, मातृत्व का अर्थ मां बनना है, इसलिए मातृत्व अवकाश का मुख्य उद्देश्य महिला और उसके बच्चे के स्वस्थ जीवन, देखभाल और उचित भरण-पोषण के लिए जरूरी समय उपलब्ध कराना है। इससे मातृत्व की गरिमा की रक्षा होती है। अदालत ने इसे महिलाओं को सामाजिक न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

शिक्षिका को 1 सितंबर 2023 से मिलेगा पूरा लाभ

मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने शिक्षिका की याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने राज्य सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिक्षिका को 1 सितंबर 2023 से प्रभावी 180 दिन का पूरा मातृत्व अवकाश मंजूर किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश की इस अवधि को सेवा में किसी तरह का व्यवधान नहीं माना जाएगा। शिक्षिका को इस दौरान का पूरा वेतन और नियमानुसार मिलने वाले सभी अन्य लाभ भी दिए जाएंगे।

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इसके अलावा, अदालत ने निर्देश दिया कि शिक्षिका ने पहले बाल देखभाल अवकाश के रूप में जितनी छुट्टी ली है, उसे मातृत्व अवकाश की अवधि में शामिल नहीं किया जाए। पहले ली गई इस छुट्टी को उनके बाल देखभाल अवकाश खाते में दोबारा जमा किया जाए। इस तरह हाईकोर्ट ने शिक्षिका को मातृत्व अवकाश, वेतन और छुट्टी से जुड़े लाभ देने का रास्ता साफ कर दिया।

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