राजस्थान विधानसभा में सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर उठे सवालों ने सरकार को बड़ा एलान करने के लिए मजबूर कर दिया। बीजेपी विधायक बाबू सिंह राठौड़ द्वारा योजना में अनियमितताओं को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने स्वीकार किया कि योजना में संगठित तौर पर अपराध हो रहा है। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) से करवाई जाएगी। सदन में दिए गए इस बयान ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर चिंताएं सामने रख दी हैं।
श्रीगंगानगर के श्रीकरणपुर का मामला
कृषि मंत्री ने बाबू सिंह राठौड़ के सवाल का जवाब देते हुए श्रीगंगानगर जिले के श्रीकरणपुर क्षेत्र का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वहां फसल नुकसान को शून्य दिखा दिया गया, जबकि वास्तविक खराबा लगभग 50 से 60 प्रतिशत तक था। आरोप है कि संबंधित बीमा कंपनी के सर्वेयर ने मिलीभगत कर स्वयं ही हस्ताक्षर कर दिए। इस कथित अनियमितता के कारण किसानों को लगभग 128 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम नहीं मिल पाया। मंत्री ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि बीमा कंपनी यह राशि अपने पास रखकर उस पर ब्याज कमा रही है।
उन्होंने सदन को बताया कि इस मामले में मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है और पुलिस जांच जारी है। सरकार का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसानों को न्याय मिल सके और दोषियों की जिम्मेदारी तय हो सके।
बीमा कंपनी पर कार्रवाई की मांग
किरोड़ी लाल मीणा ने सदन में कहा कि संबंधित बीमा कंपनी ‘क्षेमा इंश्यारेंस’ प्रथम दृष्टया डिफाल्टर प्रतीत होती है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने भारत सरकार को पत्र लिखकर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भविष्य में राज्य में उस कंपनी को कोई कार्य नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है और योजना के तहत किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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चूरू जिले की सालासर ब्रांच में फर्जी क्लेम का मामला
कृषि मंत्री ने बीमा क्लेम से जुड़े एक अन्य प्रकरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने सदन को बताया कि चूरू जिले की सालासर ब्रांच में 71 किसानों के नाम पर फर्जी बीमा क्लेम उठा लिया गया। इस मामले में सरकार ने तहसीलदार से रिपोर्ट मंगवाई थी। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि जिन नामों पर क्लेम उठाया गया, उस नाम के कोई किसान संबंधित तहसील में मौजूद नहीं थे। मंत्री ने जानकारी दी कि इस संबंध में भी राज्य सरकार की ओर से एफआईआर दर्ज करवाई जा चुकी है। मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
योजना की पारदर्शिता पर उठे सवाल
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं या अन्य कारणों से फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। ऐसे में सदन में सामने आए इन मामलों ने योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।