राजस्थान में महज छह महीने पहले बंपर जीत के साथ सत्ता में आई बीजेपी की सरकार लोकसभा आते-आते क्यूं धराशाही हो गई? विधानसभा चुनावों में मिली जीत की चमक इतनी जल्दी फीकी कैसे पड़ गई। ऐसे बहुत से सवाल अब सियासी गलियारों में उठ रहे हैं, जिनका जवाब बीजेपी के सत्ता और संगठन को देना होगा। बीजेपी सिर्फ लोकसभा चुनावों में 11 ही सीटें नहीं हारी, बल्कि इससे साथ बागीदोरा सीट पर हुए उपचुनाव भी हार गई।
इसे राजस्थान की मौजूदा सरकार की विफलता ही कहा जाएगा कि विधानसभा चुनावों का असर लोकसभा चुनावों पर नजर आया। लोकसभा में पहले चरण में जिन 12 सीटों पर चुनाव हुए उनमें लगभग 50 विधानसभा सीटें वही हैं, जो कांग्रेस विधानसभा में जीत कर आई है।
पहले चरण में 12 में आठ सीटें हारी, दूसरे में तीन
राजस्थान में दो चरणों में हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी को सबसे बड़ा झटका पहले चरण में लगा। पहले चरण की 12 लोकसभा सीटों में से बीजेपी आठ हार गई। इनमें श्रीगंगागर, सीकर, चूरू, झुंझुनूं, नागौर, भरतपुर, दौसा, करौली-धौलपुर सीट हार गई। वहीं, दूसरे चरण की 13 सीटों में से बीजेपी ने तीन सीटें गवाईं। इनमें बाड़मेर, टोंक-सवाई माधोपुर और बांसवाड़ा सीट शामिल है। यहां तक की विधानसभा चुनावों में बीजेपी जिन सीटों पर बड़े अंतर से जीती थी, उन्हीं सीटों पर लोकसभा चुनावों में वह बुरी तरह पिछड़ गई।
बांसवाड़ा: मालवीय अपनी सीट भी हारे
जिस बांसवाड़ा सीट को जीतने के लिए बीजेपी ने कांग्रेस के महेंद्रजीत मालवीय को तोड़कर अपना प्रत्याशी बनाया, वहां बीजेपी बुरी तरह हारी। महेंद्रजीत मालवीय खुद अपनी बांसवाड़ा सीट से हार गए। इसके अलावा विधानसभा चुनावों में बीजेपी के खाते में गई सागवाड़ा, गड़ी और बागीदोरा सीट पर भी बीजेपी लोकसभा में पिछड़ गई।
नागौर: जायल में बीजेपी विधानसभा में जीती लोकसभा पिछड़ी
नागौर में बीजेपी को बड़ा झटका लगा। ज्योति मिर्धा को कांग्रेस से बीजेपी में शामिल करने के बाद बीजेपी पहले यहां विधानसभा चुनाव हारी। इसके बाद लोकसभा चुनाव भी हार गई, जिन हनुमान बेनीवाल के साथ एलायंस कर बीजेपी पिछला लोकसभा चुनाव यहां से जीती थी, वे अब कांग्रेस के गठबंधन से इस बार इस सीट को जीत गए हैं।
बाड़मेर: पचपदरा, सिवाना, गुढ़ामलानी में विधानसभा चुनावों में बीजेपी जीती। लेकिन लोकसभा में इन्हीं सीटों पर पिछड़ गई।
दौसा: बांदीकुई, महुआ, सिकराय, लालसोट सीट विधानसभा चुनावों में बीजेपी के खाते में गई थी। लेकिन लोकसभा चुनावों में बीजेपी इन सभी सीटों पर पिछड़ गई।
टोंक-सवाई माधोपुर: टोंक-सवाई माधोपुर में सवाई माधोपुर सीट से बीजेपी पिछड़ गई। जबकि यहां ये बीजेपी के मंत्री किरोड़ीलाल मीणा आते हैं। खंडार से बीजेपी के जितेंद्र कुमार गोठवाल विधायक हैं, यहां भी लोकसभा में बीजेपी पिछड़ गई।
भरतपुर: कठूमर, कामां, नगर, डीग-कुम्हेर और वैर में बीजेपी विधानसभा में जीती और लोकसभा में पटखनी खा गई। जबकि यहां नगर से बीजेपी के मंत्री जवाहर सिंह बेडम विधायक हैं।
चूरू: बीजेपी के मंत्री हरलाल सहारण की सीट चूरू विधानसभा सीट पर बीजेपी लोकसभा में पिछड़ गई।
सीकर: धोध में विधानसभा चुनावों में बीजेपी जीती थीं। लेकिन लोकसभा चुनावों में हार गई।
वोट प्रतिशत कम रहने का नुकसान बीजेपी को
पहले चरण में राजस्थान में वोटिंग प्रतिशत काफी कम रहा था और तभी यह मान लिया गया था कि इसका असर परिणाम पर पड़ सकता है। इसके साथ ही इस पूरे क्षेत्र में विपक्ष की ओर से किसान आंदोलन और संविधान में बदलाव किए जाने का मुददा भी जोर-शोर से उठाया गया था। माना जा रहा है कि इन फैक्टर्स ने यहां कांग्रेस और इंडिया एलायंस की जीत सुनिश्चित की। राजस्थान में यह पहला मौका है कि जब माकपा ने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है। माकपा के अमराराम इस बार इंडी एलायंस के प्रत्याशी के रूप में सीकर से उम्मीदवार थे और उन्होंने यहां से अच्छी जीत हासिल की।