राजस्थान सरकार ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2025 का बजट पेश किया, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। इस बजट में भरतपुर, कोटा, सिरोही, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बाड़मेर और झुंझुनू समेत कई जिलों को नई सौगातें मिलीं, हालांकि कुछ प्रमुख मांगों पर अब भी निर्णय नहीं हो सका। सरकार ने इसे राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया है, जबकि विपक्ष ने इसे अधूरा करार दिया।
भरतपुर को मिली सौगातें
पूर्व मंत्री और विधायक डॉ. सुभाष गर्ग ने भरतपुर जिले के लिए बजट में की गई घोषणाओं को ऐतिहासिक बताया और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार व्यक्त किया। सरकार ने जिले में जल आपूर्ति, सड़क निर्माण, बिजली व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई बड़े प्रावधान किए हैं।
बजट में सुनारी उप स्वास्थ्य केंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में क्रमोन्नत करने की घोषणा की गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार होगा। इसके अलावा, जिले में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बछामदी, माडॉनी-मुरवारा और अघापुर में 33 केवी जीएसएस (ग्रिड सब-स्टेशन) की स्थापना की जाएगी। इससे किसानों और औद्योगिक इकाइयों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलने की उम्मीद है।
भरतपुर में एसपीजेड योजना के तहत 25 करोड़ रुपये की लागत से विद्युतीकरण कार्य किए जाएंगे, जिससे औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। सड़क सुविधाओं के विस्तार के तहत भरतपुर-मथुरा सड़क का फोरलेन निर्माण और विभिन्न सड़कों के चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण के लिए 400 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित किया गया है।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में 20 करोड़ रुपये की लागत से संरक्षण कार्य किए जाएंगे। वहीं, जिले में नवीन आईटीआई और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हनी बी कीपिंग की स्थापना होगी, जिससे स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मातृ शिशु स्वास्थ्य विंग (MCH Wing) की स्थापना की घोषणा की है।
हालांकि जिले के लोगों को यमुना से पानी लाने की योजना, मेडिकल सुविधाओं में विस्तार और होम्योपैथिक एवं यूनानी कॉलेज की मांग पूरी नहीं होने से निराशा हुई है।
कोटा के लिए की अहम घोषणाएं
कोटा जिले के विकास को गति देने के लिए सरकार ने बजट में कई अहम घोषणाएं की हैं। कोटा एयरपोर्ट के पास ऐरो सिटी बनाने की योजना घोषित की गई है, जिससे व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
राज्य सरकार ने युवाओं के कौशल विकास को ध्यान में रखते हुए कोटा में 150 करोड़ रुपये की लागत से विश्वकर्मा स्किल इंस्टीट्यूट स्थापित करने की घोषणा की है। इसके अलावा जिले के सभी कॉलेजों में नशा मुक्ति केंद्र खोले जाएंगे, जिससे युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा सके।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के तहत कोटा मेडिकल कॉलेज में कैंसर यूनिट बनाई जाएगी, जिससे कैंसर रोगियों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। वहीं कॉटेज वार्ड के निर्माण के लिए 195 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए कोटा में मिनी सचिवालय और नई जेल का निर्माण किया जाएगा। इससे जिले में प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और कानून-व्यवस्था मजबूत होगी।
हालांकि हाईकोर्ट बेंच की मांग इस बजट में पूरी नहीं हुई, जिससे अधिवक्ताओं और आम जनता में नाराजगी है। इसके अलावा चंबल रिवर फ्रंट के अगले फेज और शिक्षा एवं स्वास्थ्य के विस्तार को लेकर भी कोई ठोस घोषणा नहीं की गई।
सिरोही को ये मिला
सिरोही जिले को भी इस बजट में कई महत्वपूर्ण सौगातें मिली हैं। आबूरोड में कन्या महाविद्यालय की स्थापना की जाएगी, जिससे लड़कियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे।
जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए करोटी और वाडका में एनीकट निर्माण एवं मरम्मत कार्य किए जाएंगे। इससे सिंचाई सुविधाओं में सुधार होगा और जलस्तर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
खेल और परिवहन सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए आबूरोड में एक आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नया रोडवेज बस स्टैंड बनाया जाएगा। इसके अलावा राज्य में बनने वाले 9 ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे में सिरोही को भी शामिल किया गया है, जिससे जिले में आवागमन की सुविधाएं बेहतर होंगी।
सिरोही जिले की मेडिकल कॉलेज की मांग एक बार फिर अधूरी रह गई, जिससे स्थानीय जनता में असंतोष देखने को मिला।
चित्तौड़गढ़ को मिली सौगातें
चित्तौड़गढ़ जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सीतामाता सेंचुरी और मातृकुंडिया को टूरिस्ट सर्किट के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही जिले में खाद्य प्रयोगशाला और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की घोषणा की गई है।
उदयपुर में आदिवासी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपये की लागत से ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट बनाया जाएगा। इससे स्थानीय जनजातीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।
हालांकि उदयपुर में गंभीरी रिवर फ्रंट विकसित करने की मांग इस बजट में पूरी नहीं हुई, जिससे स्थानीय लोग निराश हैं।
झुंझुनू को भी मिला तोहफा
झुंझुनू को इस बजट में जल आपूर्ति, बिजली और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए कई बड़ी सौगातें मिली हैं।
शहरी पेयजल योजना को अमृत 2.0 योजना के तहत शामिल किया गया है, जिससे जिले में जलसंकट से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा छावसरी और जाखल में 132 केवी जीएसएस स्थापित किए जाएंगे, जबकि मुकुंदगढ़ में 33/11 केवी जीएसएस का निर्माण होगा, जिससे बिजली आपूर्ति में सुधार होगा।
सड़क निर्माण कार्यों के लिए झुंझुनू जिले को 150 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। वहीं झुंझुनू हवाई पट्टी को बड़े विमानों के लिए विकसित करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे जिले में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नवलगढ़ में ट्रॉमा सेंटर और आयुर्वेद औषधालय के उन्नयन की घोषणा की गई है।
झुंझुनू में एक बड़े सरकारी अस्पताल की मांग इस बजट में पूरी नहीं हुई, जिससे जिले के लोगों में नाराजगी है। इसके अलावा शिक्षा क्षेत्र में नए महाविद्यालयों की घोषणा न होने से भी छात्र-छात्राओं को निराशा हुई है।
बाड़मेर को भी नवाजा
बजट में बाड़मेर जिले के लिए शिक्षा, बिजली, पानी और न्यायिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया गया है। जिले में कॉलेज स्तरीय छात्रावास की स्थापना, चौहटन, तारातारा, केसुम्बला और गंगापुर में 33/11 केवी जीएसएस की स्थापना, खेतसिंह की प्याऊ में नवीन पुलिस चौकी, अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायालय और धोरीमन्ना में उप जिला परिवहन कार्यालय की स्थापना की घोषणाएं की गई हैं। इसके अलावा, लोक देवता बाबा रामदेव की जन्मस्थली रामदेरिया में भी विभिन्न विकास कार्य किए जाएंगे।
जैसलमेर जिले के लिए बजट में 50 करोड़ रुपये की लागत से रिंग रोड निर्माण, खाद्य प्रयोगशाला की स्थापना और क्लीन एंड ग्रीन ईको सिटी योजना के तहत जैसलमेर को विकसित करने की घोषणा की गई है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रामदेवरा को भी प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों के विकास योजना में शामिल किया गया है।
हालांकि, बजट में रोजगार सृजन को लेकर घोषित योजनाओं को जनप्रतिनिधियों ने अपर्याप्त बताया है। निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि सरकार ने रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कुछ घोषणाएं की हैं, लेकिन मरूस्थलीय क्षेत्र के व्यापक विकास के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें अभी भी अधूरी हैं, जिनके लिए प्रबल पैरवी की जाएगी।
वित्त मंत्री दीया कुमारी ने बजट में विभिन्न जिलों को विकास कार्यों के लिए कई सौगातें दी हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण मांगें अधूरी भी रह गईं। जहां भाजपा इस बजट को विकासोन्मुखी करार दिया, वहीं कांग्रेस ने इसे जनता के साथ मजाक बताया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इन घोषणाओं को कितनी तेजी से अमल में लाया जाता है और जनता को इनका वास्तविक लाभ कब तक मिल पाता है।