राजस्थान के बहुचर्चित दो करोड़ रुपये के घूसकांड में निलंबित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार सोनी को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता, उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों और जांच प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए यह फैसला सुनाया। ऐसे में पिछले 38 दिनों से न्यायिक हिरासत में बंद मुकेश सोनी की दिवाली अब जेल में ही मनेगी।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 27 सितंबर को मुकेश कुमार सोनी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद तीन अक्तूबर से वह उदयपुर जेल में बंद हैं। मामला उदयपुर नगर निगम के 272 भूखंडों के फर्जी पट्टा प्रकरण से जुड़ा है।
मोबाइल स्क्रीन पर लिखकर मांगे थे 2 करोड़ रुपये
आरोप है कि तत्कालीन जांच अधिकारी मुकेश कुमार सोनी ने फर्जी पट्टा प्रकरण में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगाने, अदालत में कमजोर आरोप पत्र पेश करने, आरोपियों पर कठोर धाराएं नहीं लगाने और जब्त दस्तावेज वापस लौटाने के बदले दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी।इस मामले में एसीबी ने करीब सवा महीने पहले मध्यस्थ दलाल सज्जन सिंह को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। जांच की कड़ियां जोड़ते हुए एसीबी निलंबित एएसपी तक पहुंची और उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया।
इस घूसकांड का सबसे चौंकाने वाला पहलू रिश्वत मांगने का तरीका था। आरोप है कि अपनी आवाज रिकॉर्ड होने के डर से मुकेश सोनी ने मौखिक रूप से रकम मांगने के बजाय उदयपुर की रानी रोड पर कार में बैठकर परिवादी को अपने मोबाइल की स्क्रीन पर दो करोड़ रुपये लिखकर दिखाए थे।
बचाव पक्ष की दलीलों पर भारी पड़े तकनीकी साक्ष्य
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि मुकेश सोनी ने अपने मुंह से रिश्वत की कोई सीधी मांग नहीं की थी। इसके अलावा, ट्रैप की कार्रवाई के समय वह अपने पिता के निधन के कारण बालोतरा में मौजूद थे। हालांकि, एसीबी की ओर से पेश तकनीकी साक्ष्यों के सामने बचाव पक्ष की दलीलें प्रभावी नहीं हो सकीं। जांच एजेंसी ने अदालत में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), मोबाइल टावर लोकेशन, वॉट्सऐप कॉल रिकॉर्डिंग और मोबाइल स्क्रीन पर रिश्वत की रकम दिखाने से जुड़े साक्ष्य पेश किए। हाईकोर्ट ने इन साक्ष्यों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका, जांच अभी बाकी
जमानत याचिका का अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी और परिवादी के अधिवक्ता विनोद कुमार शर्मा ने विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपी वरिष्ठ और प्रभावशाली पुलिस अधिकारी हैं। मामले की जांच अभी जारी है और अदालत में आरोप पत्र भी पेश नहीं हुआ है। कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। दलील दी गई कि जमानत मिलने पर आरोपी अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका भी है।
पुलिस अधिकारी से ईमानदारी की उम्मीद, भ्रष्टाचार से जनविश्वास को चोट
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिम्मेदार पुलिस अधिकारी से निष्पक्षता और ईमानदारी की अपेक्षा की जाती है। पद का दुरुपयोग करके दो करोड़ रुपये जैसी भारी रकम की रिश्वत मांगना अत्यंत गंभीर मामला है। अदालत ने कहा कि लोक सेवकों का ऐसा भ्रष्टाचार आम जनता के विश्वास और कानून व्यवस्था की साख पर गहरा आघात पहुंचाता है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने मुकेश कुमार सोनी की जमानत याचिका खारिज कर दी।