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Rajasthan News: डेड लाइन पूरी, नहीं आई OBC आयोग की रिपोर्ट; 31 जुलाई तक पंचायत-निकाय चुनाव पर बढ़ा संशय

Sat, 20 Jun 2026 07:33 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर/ करौली

सार

राजस्थान में पंचायत निकाय चुनावों को लेकर 20 तक सभी तरह की रिपोर्ट्स पेश किए जाने के हाईकोर्ट के निर्देशों की डेडलाइन पूरी हो गई लेकिन अब तक कोई रिपोर्ट पेश नहीं हुई है। ऐसे में अब प्रदेश में पंचायत-निकाय चुनावों की समय सीमा पर संशय खड़ा हो गया है।
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राजस्थान में दिसंबर में एक साथ होंगे पंचायत और निकाय चुनाव - फोटो : social media
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विस्तार
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राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता गहरा गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई को राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे तथा निकाय व पंचायत चुनावों से जुड़ी सभी तरह की रिपोर्ट्स को 20 जून तक पेश करने के लिए कहा था। आज 20 जून को यह डेडलाइन पूरी हो गई और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट सहित पंचायत-निकाय चुनावों से जुड़ी कोई रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। ऐसे में तय समयसीमा के भीतर चुनाव कराना मुश्किल नजर आने लगा है।

दरअसल, पंचायत और निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण आयोग की रिपोर्ट के आधार पर होना है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में आयोग के कामकाज पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि उसके ढुलमुल रवैये को चुनाव कराने में बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। इसके बावजूद आयोग की रिपोर्ट समय पर नहीं आ सकी।

चुनावी प्रक्रिया की राह में सिर्फ ओबीसी आरक्षण ही बाधा नहीं है। सरकार से जुड़े विधि विशेषज्ञों का कहना है कि एससी, एसटी और महिला आरक्षण का अंतिम निर्धारण भी राज्य सरकार के स्तर पर होना है। इसके बाद वार्डों और सीटों का आरक्षण तय होगा। ऐसे में पूरी प्रक्रिया में और समय लगना तय माना जा रहा है।

इधर मामले में याचिकाकर्ता पूर्व विधायक संयम लोढ़ा का कहना है कि वे इस मामले में विधिक विकल्प तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश थे कि निर्वाचन से जुड़ी सभी तरह की रिपोर्ट्स 20 जून पेश हो जाएं। 

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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि यदि ओबीसी आयोग समय पर रिपोर्ट नहीं देता है तो ओबीसी आरक्षित सीटों को सामान्य मानते हुए चुनाव कराए जा सकते हैं। लेकिन चुनाव आयोग का मानना है कि बिना आरक्षण से जुड़े सभी आंकड़ों और प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिए चुनाव कराना कानूनी विवादों को जन्म दे सकता है।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार पहले भी हाईकोर्ट से चुनाव के लिए दिसंबर 2026 तक का समय मांग चुकी है। सरकार ने तर्क दिया था कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, संसाधनों की उपलब्धता और आगामी निकायों के कार्यकाल को देखते हुए चुनाव बाद में कराना अधिक व्यावहारिक होगा। हालांकि हाईकोर्ट ने यह तर्क खारिज करते हुए कहा था कि चुनाव कराना सरकार का वैधानिक दायित्व है और मौसम या प्रशासनिक कारण इसके लिए बहाना नहीं बन सकते।

अब जबकि 20 जून की समयसीमा गुजर चुकी है और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट सामने नहीं आई है, राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं और चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त समय मांग सकते हैं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से तय 31 जुलाई की समयसीमा के भीतर पंचायत और निकाय चुनाव संभव हो पाएंगे, या फिर चुनावी कैलेंडर एक बार फिर आगे खिसक जाएगा।

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