निर्वाचन विभाग का मानना है कि इस तरह का असामान्य मतदान पैटर्न कई बार मतदाताओं पर दबाव, प्रभाव या संगठित वोटिंग की आशंका की ओर संकेत करता है। ऐसे मतदान केंद्रों की अलग से समीक्षा कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी।
निर्देशों के अनुसार जिला निर्वाचन अधिकारी और पुलिस प्रशासन पिछले चुनावों के मतदान आंकड़ों का विश्लेषण करेंगे। यदि किसी बूथ पर अत्यधिक मतदान के साथ एक उम्मीदवार को असामान्य रूप से अधिक वोट मिले हैं, तो उसे संवेदनशील या अतिसंवेदनशील मतदान केंद्र की सूची में शामिल किया जा सकता है।
ऐसे बूथों पर मतदान के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल, माइक्रो ऑब्जर्वर, वेबकास्टिंग, सीसीटीवी निगरानी और सेक्टर अधिकारियों की विशेष निगरानी रहेगी। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की भी तैनाती की जा सकती है।
इन आधारों पर भी होगी संवेदनशील बूथों की पहचान
निर्वाचन विभाग केवल मतदान प्रतिशत के आधार पर ही नहीं, बल्कि हिंसा, बूथ कैप्चरिंग, फर्जी मतदान, चुनाव बहिष्कार, आपराधिक गतिविधियों, सांप्रदायिक या जातीय तनाव और बाहुबलियों के प्रभाव जैसे अन्य पहलुओं को भी संवेदनशीलता के आकलन में शामिल करेगा।
अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य किसी क्षेत्र या उम्मीदवार को निशाना बनाना नहीं, बल्कि मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त बनाना है, ताकि प्रत्येक मतदाता बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।