अमर उजाला के साथ में खास बातचीत करते हुए बांसवाड़ा-डूंगरपुर के सांसद राजकुमार रोत ने दिल्ली में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, सांसद होने के नाते मैंने उनसे समय मांगा और उन्होंने मुझे समय दिया, जब समय मिला तो मैंने डूंगरपुर बांसवाड़ा के विषय में प्रधानमंत्री के साथ में कई अहम विषयों के ऊपर चर्चा की। मैंने मेरी लोकसभा क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के लिए एवं रेल मार्ग सुगम करने के लिए प्रधानमंत्री के आगे मांग रखी।
सवाल- प्रधानमंत्री ने यह नहीं पूछा कि यह वही लड़का है जो आदिवासियों को हिंदू नहीं बताता इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई ?
जवाब- वह प्रधानमंत्री हैं, वह सब जानते हैं और वह समझते भी हैं। वह कहते नहीं, लेकिन वह सारी बातें समझते हैं। इसलिए मैंने जब यह कहा कि आदिवासी हिंदू नहीं है, जो मैं आज भी मानता हूं, पर इसके पीछे मेरा कहने का मकसद किसी और धर्म को नीचा दिखाना नहीं है। मेरा कहना बड़ा स्पष्ट है कि आदिवासी न तो हिंदू है न मुसलमान है, न सिख है और ना इसाई है। आदिवासियों की अपनी खुद की एक पूजा पद्धति है, जिसको आदिवासी सदियों से मानते और पूजते चले आ रहे हैं। अब अगर मैं यह कहता हूं कि आदिवासी हिंदू नहीं है, तो इसमें हिंदू धर्म का अपमान करना मेरा मकसद नहीं है।
संसद भवन परिसर में धक्कामुक्की पर क्या कुछ बोले राजकुमार रोत
देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा में धक्का मुक्की व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर मुकदमा दर्ज होना जैसे गंभीर विषय पर बात करते हुए सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि यह एक गंभीर प्रश्न है, मैं भी इस प्रश्न से जूझ रहा हूं। उन्होंने कहा कि आज देश में युवा एवं पिछड़े हुए लोग 2 रुपए, 5 रूपए के लिए परेशान हैं। लोगों को दो वक्त का खाना नहीं मिल पा रहा है। परंतु इस देश को सुचारू रूप से चलने के लिए करोड़ों रुपए खर्च करके भी सदन की कार्रवाई क्यों नहीं चल पा रही है।
सांसद ने कहा विपक्ष का काम है मुद्दे रखना, विपक्ष तो विरोध करेगा। हम अडानी के विषय पर चर्चा चाहते हैं, पर सरकार चर्चा से पीछे हट रही है तो विरोध तो होगा, लेकिन जो समय की बर्बादी हो रही है, उस समय में देश के विकास के लिए चर्चा की जा सकती थी जो नहीं हुई, इसका भारी अफसोस है। आगे बात करते हुए सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि रही बात धक्का मुक्की की तो संसद भवन देश का सबसे सुरक्षित स्थान है। हजारों की संख्या में वहां कैमरे लगे हुए हैं, अगर कोई तिनका भी उड़ता है तो उन कैमरों की पकड़ में आ जाता है। अगर किसी ने किसी को धक्का दिया है तो क्यों उस रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है।
सवाल- जांच चल रही है तो जांच में कैमरे की रिकॉर्डिंग सार्वजनिक कैसे हो सकती है?
जवाब- रोत ने कहा कि जांच चल रही है, हमें कोई दिक्कत नहीं है और न मैं किसी का बचाव कर रहा हूं और ना किसी पर आरोप लगा रहा हूं, लेकिन सवाल यह है कि विपक्ष विरोध कर रहा है, विरोध करना विपक्ष का अधिकार है। परंतु सत्ता पक्ष ही नारेबाजी करने लग जाए ये कहां तक उचित है। विपक्ष विरोध कर रहा है, सत्ता पक्ष दरवाजे को घेर कर बैठा है। सत्ता पक्ष सांसदों को अंदर ही नहीं जाने दे रहा है। हम गैलरी में रास्ता बनाकर जा रहे हैं। सत्ता पक्ष आक्रामक हो रहा है।