राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस विधायकों के निलंबन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भाजपा सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा की तरह अब विधानसभा में भी विपक्ष की आवाज दबाने का तरीका अपनाया है।
गहलोत ने कहा, पहले भाजपा सरकार के एक मंत्री द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर अमर्यादित टिप्पणी की गई और जब कांग्रेस विधायकों ने इसका विरोध किया, तो उन्हें सदन से निलंबित कर दिया गया। यह दर्शाता है कि सरकार अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए विपक्ष को दबाने में जुटी है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रश्नकाल के दौरान मंत्री को अपने जवाब के अलावा इस तरह की टिप्पणी करने की क्या आवश्यकता थी। गहलोत ने कहा कि देश के लिए जान देने वाली नेता पर की गई अपमानजनक टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। गहलोत ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार पूरी तरह से तमाशा बन गई है और उसके पास पिछले एक साल में गिनाने के लिए कोई उपलब्धि नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए सत्र में नेता प्रतिपक्ष का भाषण नहीं होने दे रही है और अब दलित, पिछड़े, आदिवासी एवं अल्पसंख्यक वर्ग के विधायकों को भी निलंबित किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं यह बजट पर चर्चा से ध्यान भटकाने की कोशिश तो नहीं है। इस घटनाक्रम के बाद राजस्थान की राजनीति में हलचल मची हुई है और कांग्रेस लगातार भाजपा सरकार पर हमलावर है।
छह कांग्रेस विधायक बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित
राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को हंगामे के बाद स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कांग्रेस के छह विधायकों को निलंबित कर दिया है। हंगामे के चलते तीन बार स्थगित होने के बाद शाम चार बजे सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई। इसमें सत्ता पक्ष की तरफ से मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कांग्रेस विधायकों के निलंबन का प्रस्ताव रखा। यह प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित मान लिया गया। इनमें कांग्रेस विधायक जाकिर हुसैन गेसावत, संजय जाटव, गोविंद सिंह डोटासरा, रामकेश मीणा, अमीन कागजी और हाकम अली खान को शेष बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया है।
गर्ग ने रखा था यह प्रस्ताव
सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर ने शाम चार बजे सदन में सुबह की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि सदन की परंपरा को भारी नुकसान पहुंचाया गया है, जो अक्षम्य है। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस के छह विधायकों का नाम लेते हुए उन्हें निलंबत करने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद स्पीकर ने ध्वनि मत से इस प्रस्ताव को पारित मान कर कांग्रेस विधायकों के निलंबन का एलान कर दिया।
यह था विवाद?
सुबह प्रश्नकाल के दौरान पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया था। इसके बाद तीन बार सदन की कार्यवाही स्थगित की गई। शाम चार बजे स्पीकर ने सत्ता पक्ष के प्रस्ताव के बाद आसन के समक्ष अशोभनीय व्यवहार के आरोप में निलंबित कर दिया। प्रश्नकाल के दौरान जबरदस्त बवाल हो गया। सरकार के मंत्री टिप्पणी से भड़के कांग्रेस विधायक पहले वेल में आए, फिर स्पीकर की डायस पर चढ़ गए। स्पीकर को सदन में मार्शल बुलाने पड़े। इसके बाद कांग्रेस विधायकों और मार्शल प्रतिनिधियों के बीच जबरदस्त धक्का-मुक्की हो गई। हंगामे के चलते सदन की कार्रवाई दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।