राजस्थान की अंता विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी मोरपाल सुमन को प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के बाद अब मामला अनुशासन समिति तक पहुंच गया है। मोरपाल सुमन ने तीन दिन की निर्धारित अवधि के भीतर अपना जवाब प्रदेश अध्यक्ष को सौंप दिया है।
प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ इस समय राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही में व्यस्त हैं और दिल्ली से जयपुर लौट रहे हैं। इस बीच उन्होंने टेलीफोनिक बातचीत में पुष्टि की कि मोरपाल सुमन का जवाब प्राप्त हो चुका है और अब पूरे प्रकरण को पार्टी की अनुशासन समिति के समक्ष भेजा जा रहा है, जो आगे की कार्रवाई तय करेगी।
वायरल चिट्ठी से बढ़ा विवाद
वहीं विधायक राधेश्याम बैरवा ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “यह पूरी तरह गलत है। हमने पूरे चुनाव के दौरान मोरपाल सुमन का पूरा समर्थन किया। हार-जीत तो राजनीति का हिस्सा है।”
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भाजपा के भीतर उठे कई सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अनुशासन समिति की जांच केवल मोरपाल सुमन तक सीमित रहेगी? क्या वायरल पत्र में जिन वरिष्ठ नेताओं के नाम आए हैं, उनसे भी पूछताछ होगी? क्या जांच के दौरान और नाम सामने आ सकते हैं? क्या पार्टी संगठन प्रभावशाली नेताओं पर भी कार्रवाई करने का साहस दिखाएगा?
फिलहाल इन सवालों के जवाब भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन इतना तय है कि यह मामला आने वाले दिनों में भाजपा की अंदरूनी राजनीति को और अधिक गर्माने वाला है।