जयपुर के भांकरोटा में हुए भयावह एलपीजी ब्लास्ट में झुलसी महापुरा निवासी रीना शर्मा ने 58 दिन बाद एसएमएस अस्पताल में दम तोड़ दिया। बीते दो महीने से बर्न वार्ड (आईसीयू) में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन शनिवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली। इस दर्दनाक हादसे में मरने वालों की संख्या अब 21 हो गई है।
जानकारी के अनुसार हादसे वाले दिन 20 दिसंबर को रीना अपने पति रमेश शर्मा के साथ नई मोटर साइकिल लेकर घर से निकली थीं। तभी भांकरोटा के पास एलपीजी टैंकर ब्लास्ट में दोनों 70 फीसदी तक झुलस गए। हादसे के बावजूद वे घटनास्थल से करीब 2 किलोमीटर तक पैदल चलने में सफल रहे थे लेकिन 58 दिनों के संघर्ष के बाद आखिर रीना ने दम तोड़ दिया।
हादसे के बाद से ही शर्मा परिवार आर्थिक और मानसिक संघर्ष से जूझ रहा है। उनकी बेटी सदमे की वजह से अपनी सहेली के घर रह रही है, वहीं बेटे की पढ़ाई भी पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
रीना के बेटे देव शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि ऐसे केस में सर्जरी के लिए शरीर से स्किन ली जाती है, जिससे जल चुकी त्वचा को रिपेयर किया जाता है लेकिन रीना के शरीर पर बिना झुलसी हुई स्किन बची ही नहीं थी, जिससे इलाज संभव नहीं हो पाया। पिछले चार दिनों से उन्होंने बात करना और खाना-पीना भी बंद कर दिया था।
भांकरोटा अग्निकांड में अब तक 21 लोगों की जानें जा चुकी हैं। इस हादसे में घायल हुए 34 लोगों में से अब केवल दो लोग, रमेश शर्मा और हरियाणा के महेंद्रगढ़ निवासी कपिल कुमार ही जीवित बचे हैं। कपिल कुमार को जनवरी में और रमेश शर्मा को 4 फरवरी को एसएमएस अस्पताल के बर्न वार्ड आईसीयू से डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया था। बहरहाल परिवार ने सरकार और प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की है, ताकि वे इस कठिन समय में अपने जीवन को दोबारा पटरी पर ला सकें।