फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jaipur: 11 महीनों से बिना वेतन के काम कर रहे व्यासायिक प्रशिक्षकों ने दिया धरना, सरकार के सामने रखी ये मांगें

Tue, 20 May 2025 02:59 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत पिछले 11 वर्षों से राज्य के विभिन्न राजकीय विद्यालयों में व्यावसायिक प्रशिक्षण दे रहे लगभग पांच हजार व्यावसायिक प्रशिक्षक शहीद स्मारक पर धरने पर बैठे हैं।
विज्ञापन
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजस्थान में व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहे लगभग 5 हजार व्यावसायिक प्रशिक्षक इन दिनों शहीद स्मारक, जयपुर पर जोरदार धरने पर बैठे हैं। इन प्रशिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 11 महीनों से बिना वेतन के काम कर रहे हैं और शिक्षा विभाग तथा निजी एजेंसियों द्वारा लगातार शोषण का शिकार हो रहे हैं।

विज्ञापन



ये प्रशिक्षक राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत पिछले 11 वर्षों से राज्य के विभिन्न राजकीय विद्यालयों में बच्चों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दे रहे हैं लेकिन इन्हें सीधे सरकारी नियुक्ति के बजाय ठेका आधारित एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त किया जाता है, जिससे इन्हें न केवल नौकरी की स्थायित्वता से वंचित रहना पड़ता है, बल्कि समय पर वेतन जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी हाथ धोना पड़ता है।

प्रदर्शन कर रहे प्रशिक्षकों ने सरकार के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें

सीधी नियुक्ति या समायोजन की मांग

व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने मांग की है कि उन्हें शोषणकारी एजेंसी प्रणाली से मुक्त कर शिक्षा विभाग में कार्मिक विभाग (क-5) के आदेश RajKaj Ref No.: 14921662, दिनांक 25 अप्रैल 2025 के तहत समायोजित किया जाए और हरियाणा मॉडल या RLSDC के अंतर्गत स्थायी नियुक्ति दी जाए।
विज्ञापन


समय पर वेतन भुगतान

प्रशिक्षकों ने मांग की है कि उन्हें भी अन्य राज्यों के प्रशिक्षकों की तर्ज पर हर माह की 10 तारीख से पहले वेतन दिया जाए ताकि उन्हें आर्थिक अस्थिरता से मुक्ति मिले।

अवकाश की सुविधा

महिला प्रशिक्षकों को मातृत्व अवकाश, पुरुष प्रशिक्षकों को पितृत्व अवकाश तथा सभी को आपातकालीन परिस्थितियों में मेडिकल लीव देने की व्यवस्था की जाए।

मानदेय में वार्षिक वृद्धि

हर वित्तीय वर्ष में उनके वेतन-मानदेय में 10% की नियमित वृद्धि लागू की जाए, ताकि महंगाई और जीवन यापन की लागत के अनुरूप उनकी आय में सुधार हो सके।

प्रशिक्षकों का कहना है कि वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें केवल टेंडर प्रक्रिया की भेंट चढ़ाकर बार-बार निकाला जा रहा है, जिससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुके हैं। कई प्रशिक्षक ऐसे भी हैं, जिनका पूरा जीवन व्यावसायिक शिक्षा को समर्पित है लेकिन अब वे खुद को अस्थिर और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की है कि वे इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें और उनकी सेवाओं को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करें। धरने पर बैठे प्रशिक्षकों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें शीघ्र नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें