जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में गंभीर मरीजों को रेफर करने की व्यवस्था में बदलाव की तैयारी है। अब जनाना, महिला चिकित्सालय, कांवटिया और गणगौरी अस्पताल सहित दूसरे अटैच हॉस्पिटल से गंभीर मरीजों और प्रसूताओं को एसएमएस अस्पताल की इमरजेंसी में भेजने से पहले सूचना देनी होगी। इसके लिए मेडिकल कॉलेज और अस्पताल प्रशासन नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रहा है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य इमरजेंसी में अचानक पहुंचने वाले गंभीर मरीजों के इलाज और उनके लिए जरूरी संसाधनों की व्यवस्था को बेहतर बनाना है। प्रस्तावित एसओपी के तहत मरीज की पूरी जानकारी और उसकी जांच व इलाज का ब्योरा भी साथ भेजना होगा।
बिना सूचना मरीज भेजने पर डॉक्टरों पर हो सकती है कार्रवाई
एसएमएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल प्रशासन को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि अटैच हॉस्पिटलों से गंभीर मरीजों को बिना पूर्व सूचना दिए एसएमएस इमरजेंसी में रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी होती है। वहीं, इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को अचानक आने वाले गंभीर मरीजों के लिए इलाज और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करने में दिक्कत होती है।
इन शिकायतों को देखते हुए कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी और अस्पताल अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी ने नई एसओपी जारी करने का निर्णय लिया है। इसके तहत बिना सूचना मरीज रेफर करने पर संबंधित यूनिट हेड और रेफर करने वाले डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान किया जाएगा। साथ ही, मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री निर्धारित फॉर्मेट में भेजना अनिवार्य होगा।
जांच और शुरुआती इलाज के बाद ही एसएमएस भेज सकेंगे मरीज
नई व्यवस्था के तहत जनाना, महिला चिकित्सालय, कांवटिया और गणगौरी सहित दूसरे अटैच हॉस्पिटलों की इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की पहले जरूरी जांच करनी होगी और उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार इलाज शुरू करना होगा। बिना जांच और इलाज किए मरीज को एसएमएस अस्पताल रेफर करने पर भी कार्रवाई हो सकती है।
यदि मरीज की स्थिति ऐसी है कि उसे एसएमएस अस्पताल में इलाज की जरूरत है, तो रेफर करने वाले अस्पताल को उसकी जांच रिपोर्ट और अब तक किए गए इलाज का पूरा ब्योरा निर्धारित फॉर्मेट में भेजना होगा। गंभीर मरीज को रेफर करने से पहले एसएमएस इमरजेंसी को सूचना भी देनी होगी, ताकि मरीज की स्थिति के अनुसार इलाज और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की जा सके।
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एक साथ तीन गंभीर मरीज पहुंचने से बढ़ा था दबाव
एसएमएस इमरजेंसी के स्टाफ के मुताबिक, हाल ही में जनाना अस्पताल से तीन मरीज बिना पूर्व सूचना के एसएमएस इमरजेंसी पहुंचे थे। स्टाफ का कहना है कि तीनों मरीजों की स्थिति गंभीर थी और उन्हें तत्काल इलाज की जरूरत थी। जरूरत पड़ने पर आईसीयू की व्यवस्था भी करनी पड़ सकती थी।
ऐसे मामलों में मरीजों के अचानक पहुंचने से इमरजेंसी में उपलब्ध संसाधनों और स्टाफ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। प्रशासन को उम्मीद है कि नई एसओपी लागू होने से रेफरल की प्रक्रिया व्यवस्थित होगी और गंभीर मरीजों के इलाज के लिए समय पर जरूरी इंतजाम किए जा सकेंगे।