जयपुर के गड़े खजानों का रहस्य फिर जिंदा
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कई हवेलियां भी रही हैं खजाने की तलाश का केंद्र
इतिहासकार एवं वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, जयपुर की कई पुरानी हवेलियों में वर्षों से खजाना मिलने की लोककथाएं प्रचलित हैं। उनके मुताबिक, जगन्नाथ जी की हवेली, सम्राट जी की हवेली, पांड्रिक जी की हवेली और ताड़केश्वर मंदिर के पीछे स्थित हवेली के आंगनों में भी कभी खजाने की तलाश में खुदाई की गई थी। हालांकि इन घटनाओं का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह माना जाता है कि इन स्थानों से कभी मूल्यवान वस्तुएं निकली थीं, जो बाद में बिखर गईं या गायब हो गईं।
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आमागढ़ से नाहरगढ़ तक खजाने की तलाश की कहानियां
जितेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, आमागढ़ क्षेत्र में भी वर्षों पहले खजाने की तलाश में आंगनों की खुदाई की गई थी। करीब दस वर्ष पहले एक साधु द्वारा यहां कथित रूप से खजाना निकालने का प्रयास भी चर्चा में रहा था। इसी तरह खो नागौरियान के ऐतिहासिक किले को भी लोगों ने खजाने की उम्मीद में क्षतिग्रस्त कर दिया। गलता जी के ऊपर स्थित रघुनाथगढ़ से भी समय-समय पर खजाना मिलने की चर्चाएं सामने आती रही हैं, लेकिन इसका कोई प्रमाण कभी नहीं मिला। वहीं, नाहरगढ़ किले के आथूनी कुंड स्थित बुर्ज में भी कथित खजाने की तलाश में अवैध खुदाई किए जाने की बातें स्थानीय लोग बताते हैं।
फागी में अफवाह ने मचा दी थी हलचल
जयपुर जिले के फागी क्षेत्र के चौरू गांव में कुछ वर्ष पहले पुराने सिक्के मिलने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग रातों-रात फावड़े और कुदाल लेकर खेतों और खाली जमीनों में खजाना खोजने निकल पड़े थे। बाद में यह मामला महज अफवाह साबित हुआ, लेकिन इस घटना ने यह जरूर दिखाया कि गड़े खजानों को लेकर लोगों में आज भी कितनी उत्सुकता और रोमांच है।
कानून क्या कहता है?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि कहीं गड़ा हुआ खजाना मिलता है तो उस पर किसी व्यक्ति का स्वतः स्वामित्व नहीं माना जाता। इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878 तथा राजस्थान में लागू संबंधित नियमों के तहत ऐसे मामलों की सूचना प्रशासन को देना अनिवार्य है। जांच के बाद कानून के अनुसार यह तय किया जाता है कि उस खजाने पर राज्य सरकार का अधिकार होगा या नहीं।