राजस्थान की राजधानी जयपुर में ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में चल रहे अवैध सट्टेबाजी के नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस मुख्यालय के 'म्यूल हंटर' अभियान के तहत की गई कार्रवाई में करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का खुलासा हुआ है। पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े 50 से अधिक बैंक खाते और 35 से ज्यादा यूपीआई आईडी की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करवा दिया है। इसके अलावा विभिन्न बैंक खातों में जमा करीब पांच लाख रुपये की राशि फ्रीज कराई गई है। आरोपियों के 3,200 यूएसडीटी वाले क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट को भी ब्लॉक करवाया गया है। इसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 3.50 लाख रुपये बताई जा रही है।
मास्टर आईडी से चल रहा था सट्टेबाजी का नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि गिरोह के आरोपी खुद अलग-अलग ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी की वेबसाइटों के पैनल खरीदकर उनका संचालन कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक मास्टर आईडी भी बरामद की है। इसी के माध्यम से पूरा ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
आरोपी अलग-अलग ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए आम लोगों को सट्टा खिलवाते थे। इस खेल में शामिल होने वाले ज्यादातर लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम के लेन-देन के लिए आरोपी बैंक खातों, यूपीआई आईडी और यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट का इस्तेमाल करते थे। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 19 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और 20 सिम कार्ड भी जब्त किए हैं। पुलिस अब इन उपकरणों और डिजिटल माध्यमों के जरिए गिरोह के कामकाज से जुड़ी जानकारियां जुटा रही है।
अजमेर और बालोतरा के सात आरोपी गिरफ्तार
पुलिस उपायुक्त वेस्ट प्रशांत किरण के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में अजमेर जिले के मदनगंज-किशनगढ़ निवासी वैकेंद्र यादव (31), शैलेंद्र शर्मा (26) और रोहित मेघवाल (23) शामिल हैं। इसके अलावा बालोतरा निवासी मुकेश गुर्जर (27) और लक्ष्मण कुमार (25), पचपदरा, बालोतरा निवासी रमेश कुमार जाट (22) तथा समदड़ी रोड, बालोतरा निवासी रमेश कुमार जाट (26) को भी गिरफ्तार किया गया है। गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी में सुरेंद्र और राजेश की विशेष भूमिका रही है।
पैनल उपलब्ध कराने वालों की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस टीम अब जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप, मास्टर आईडी, बैंक खातों, यूपीआई आईडी और यूएसडीटी वॉलेट का विस्तृत तकनीकी विश्लेषण कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपियों को ऑनलाइन सट्टेबाजी के पैनल कौन उपलब्ध करवाता था और इस नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। इसके साथ ही पुलिस अवैध सट्टेबाजी के नेटवर्क और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है। गिरोह के अन्य संदिग्ध सदस्यों की पहचान और तलाश के लिए गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है।