देश के अग्रणी स्वास्थ्य प्रबंधन अनुसंधान संस्थानों में से एक आईआईएचएमआर विश्वविद्यालय में पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. रघुनाथ अनंत माशेलकर को अपने प्रतिष्ठित प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया है। उनकी यह नियुक्ति विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और अनुसंधान प्रयासों को नए आयाम देने के उद्देश्य से की गई है।
डॉ. माशेलकर जोकि पॉलिमर विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका के लिए विख्यात हैं। भारतीय स्वास्थ्य सेवा और नवाचार के भविष्य को लेकर अपने विचारों के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने हमेशा से इस बात पर जोर दिया है कि भारतीय चुनौतियों के समाधान के लिए भारतीय परिस्थितियों में नवाचार की आवश्यकता है। उनकी इसी सोंच के चलते उन्हें गांधीवादी इंजीनियरिंग के समावेशी नवाचार आंदोलन का भी प्रमुख चेहरा माना जाता है।
हमारे लिए यह गर्व का विषय
आईआईएचएमआर विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट, डॉ. पी आर सोडानी ने डॉ. माशेलकर की नियुक्ति पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे लिए यह गर्व का विषय है कि डॉ. माशेलकर जैसे महान शिक्षाविद हमारे साथ जुड़े हैं। उनके ज्ञान और नेतृत्व से न केवल हमारा शैक्षणिक वातावरण समृद्ध होगा, बल्कि यह हमारे समुदाय को उत्कृष्टता की दिशा में प्रेरित करेगा।
नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन और ग्लोबल रिसर्च अलायंस में निभाई भूमिका
डॉ. माशेलकर को उनके विशिष्ट वैज्ञानिक योगदानों के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा है। उन्होंने अपने करियर में नेशनल कैमिकल लेबोरेटरी और सीएसआईआर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है। साथ ही उन्होंने कई प्रमुख संगठनों जैसे नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन और ग्लोबल रिसर्च अलायंस में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।
महत्वपूर्ण पुस्तकों का सह-लेखन किया
आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के साथ जुड़ाव से पहले, डॉ. माशेलकर ने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का सह-लेखन किया है, जिनमें से ‘लीप फ्रॉगिंग टू पोल वॉल्टिंग’ ने 2019 में टाटा लिट फेस्टिवल में बेस्ट बिजनेस बुक ऑफ द इयर का पुरस्कार जीता था। उनकी पुस्तक ‘एक्सप्रोवमेंट’ भी नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान मानी जाती है।
डॉ. माशेलकर की यह नई भूमिका न केवल आईआईएचएमआर विश्वविद्यालय के लिए, बल्कि भारतीय स्वास्थ्य प्रबंधन शिक्षा के लिए भी एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।