जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के जनवरी-2027 में 14 जनवरी से शुरू होने वाले बीसवें संस्करण के लिए वक्ताओं की पहली सूची जारी कर दी गई है। दो दशक पूरे होने के अवसर पर फेस्टिवल में नोबेल पुरस्कार विजेताओं से लेकर बुकर और पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित हस्तियों का जमावड़ा रहेगा। इस बार साहित्य के साथ विज्ञान, इतिहास, राजनीति, अर्थव्यवस्था, कानून, तकनीक, खान-पान, फैशन और कला जैसे विविध विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार बीसवां संस्करण उन भाषाओं, संस्कृतियों और विचारों को एक मंच पर लाएगा जिन्होंने समकालीन वैश्विक साहित्य और सामाजिक विमर्श को आकार दिया है।
नोबेल विजेताओं और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों की भागीदारी
पहली सूची में अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त एस्थर डुफ्लो और साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पोलैंड की लेखिका ओल्गा टोकार्चुक के नाम प्रमुख हैं। इनके अलावा ब्रिटेन की अभिनेत्री और लेखिका डेम मीरा सयाल, बीबीसी की वरिष्ठ पत्रकार लीज डूसे, लेखक जेम्स वुड, लेखिका इसाबेला हम्माद, गणितज्ञ मार्कस डू सॉटॉय और जीवाश्म विज्ञानी स्टीव ब्रुसैट भी इस महोत्सव में शामिल होंगे।
वैश्विक स्तर पर चर्चित रचनाकारों में तहमीमा अनम, उमर अल अक्काद, अवनि दोशी, करण महाजन, वली नस्र और डेविड वैन रेब्रुक जैसे नाम भी पहली सूची में शामिल हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय फैशन डिजाइनर प्रबल गुरुंग, उद्यमी किरण मजूमदार-शॉ, लेखिका सुधा मूर्ति और शिक्षाविद होमी के. भाभा की उपस्थिति इस महोत्सव को विभिन्न क्षेत्रों के बहुआयामी विमर्श से जोड़ेगी।
आयोजन के दौरान विज्ञान और प्राकृतिक इतिहास से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर मार्कस डू सॉटॉय विज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने के अनुभव साझा करेंगे। जीवाश्म विज्ञानी स्टीव ब्रुसैट विज्ञान और प्राकृतिक इतिहास से जुड़े सत्रों का हिस्सा बनेंगे।
भारतीय भाषाई विविधता को मिलेगा विशेष मंच
फेस्टिवल के बीसवें संस्करण में भारत की भाषाई विविधता को विशेष महत्व दिया जाएगा। महोत्सव में हिंदी, तमिल, मलयालम, असमिया, कोंकणी, कन्नड़, मराठी, भोजपुरी, सिंधी और मणिपुरी सहित देश की अलग-अलग भाषाई परंपराओं के लेखकों को मंच मिलेगा।
हिंदी की कवयित्री अनामिका, संस्कृत के विद्वान राधावल्लभ त्रिपाठी, असमिया लेखक ध्रुवज्योति बोरा, मराठी नाटककार मकरंद साठे, मलयालम के लेखक पॉल जकारिया और कोंकणी साहित्यकार दामोदर मौजो इस सूची का हिस्सा हैं। कन्नड़ लेखक वसुधेंद्र, हिंदी और भोजपुरी के लेखक गौतम चौबे तथा गुजराती लेखक राम मोरी भी मौजूद रहेंगे। तमिल और मलयालम साहित्य में सक्रिय बी. जयमोहन भी महोत्सव के विचार सत्रों को संबोधित करेंगे।
समकालीन सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर विमर्श
साहित्यिक संवादों के साथ यह फेस्टिवल वर्तमान दुनिया के कई अहम सवालों पर भी विचार-विमर्श करेगा। इस बार वैश्विक राजनीति, साम्राज्यों और प्रवासन का इतिहास, जाति, लोकतंत्र, संघर्ष, पहचान और अपनेपन जैसे विषय मुख्य विमर्श के केंद्र में रहेंगे। अलग-अलग देशों और पीढ़ियों से आने वाले लेखक और विचारक अपने अनुभवों के माध्यम से इन मुद्दों की समीक्षा करेंगे।
सार्वजनिक जीवन की हस्तियों में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी, वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह तथा पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश संजय किशन कौल चर्चाओं का नेतृत्व करेंगे। इनके साथ ही श्रबनी बसु, संजॉय हजारीका और जादूगर तथा किस्सागो ड्रमंड मनी-कुट्स इतिहास, संस्कृति और कहानी सुनाने की परंपराओं के विविध पक्षों पर विचार प्रस्तुत करेंगे। अभिनेत्री डेम मीरा सयाल और फैशन डिजाइनर प्रबल गुरुंग कला, पहचान और लोकप्रिय संस्कृति पर बातचीत करेंगे।
बीस वर्षों की यात्रा और भविष्य का दृष्टिकोण
टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर संजॉय के. रॉय ने कहा कि दो दशक पूरे होने के बाद भी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की मूल भावना वही है- एक ऐसा खुला मंच जहां अलग-अलग विचार मिलते हैं और नई बातचीत की शुरुआत होती है। हर साल बड़ी संख्या में युवा दर्शक पांच दिनों तक साहित्य, कला, संगीत, खान-पान, डिजाइन और वास्तुकला से जुड़े अनुभवों का हिस्सा बनते हैं।
फेस्टिवल की सह-संस्थापक और सह-निदेशक नमिता गोखले ने कहा कि राजस्थान की राजधानी में एक छोटे साहित्यिक आयोजन के रूप में शुरू हुआ यह फेस्टिवल आज दुनिया के प्रमुख साहित्यिक आयोजनों में शामिल है। दो दशकों की इस यात्रा में विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के लेखकों को एक-दूसरे से जुड़ने और विचार साझा करने का अवसर मिला है।
सह-निदेशक विलियम डैलरिम्पल ने बीसवें संस्करण को महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि फेस्टिवल की खासियत स्थापित लेखकों के साथ उभरती साहित्यिक आवाजों, वैज्ञानिकों, इतिहासकारों और कलाकारों को एक ही मंच पर लाना है। यह आयोजन हमेशा नई खोजों और विचारों के आदान-प्रदान का मंच रहा है और इसका अगला संस्करण भी इसी भावना को आगे बढ़ाएगा।