जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 में पैरा ओलंपियन और अर्जुन पुरस्कार विजेता दीपा मलिक ने अपनी किताब ब्रिंग इट ऑन का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों और खेल के प्रति अपने समर्पण की प्रेरणादायक कहानी साझा की।
दीपा ने बताया कि वर्ष 1999 में स्पाइनल ट्यूमर के कारण उन्हें व्हील चेयर का सहारा लेना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। खेल के माध्यम से उन्होंने जीवन को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि अगर खुद पर भरोसा है, तो ईश्वर भी वह लिखेगा, जो तुम चाहो। दीपा मलिक ने कहा कि किसी भी देश के मैडल उसकी जनसंख्या पर निर्भर नहीं करते, बल्कि उस देश में खेलने वाली जनसंख्या पर निर्भर करते हैं। उन्होंने खेल संस्कृति को बचपन से विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ओलंपिक और पैरालंपिक मैडल की तुलना पर उन्होंने कहा, ओलंपिक और पैरालंपिक को केवल इंक्लूजन के रूप में देखा जाना चाहिए। पैरालंपिक में अलग-अलग श्रेणियों और अवसरों की संख्या अधिक होती है। इसलिए दोनों को कंपेयर करना उचित नहीं है। दीपा ने कहा कि आज खेलों में गवर्नमेंट और स्टेक होल्डर्स का ध्यान बढ़ा है। उन्होंने कहा कि गुड गवर्नेंस, मीडिया की जागरूकता और सेलिब्रेशन से खेल जगत में सकारात्मक बदलाव आया है।