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Rajasthan News: पहचान हो रही चोरी ; आधार डेटा खतरे में, AI टूल्स से हो रही नई तरह की ठगी

Thu, 21 May 2026 07:42 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

साइबर ठगों ने आपकी पहचान को ही खतरे में डाल दिया है। राजस्थान पुलिस ने AI और डीपफेक आधारित साइबर ठगी को लेकर अलर्ट जारी किया है। अपराधी ChatGPT, Gemini और Grok जैसे टूल्स से आधार बायोमेट्रिक व फेस ऑथेंटिकेशन का दुरुपयोग कर डिजिटल अकाउंट्स और बैंकिंग सेवाओं में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
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(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक अब साइबर ठगी का नया हथियार बनती जा रही है। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन को सतर्क करते हुए एडवाइजरी जारी की है। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी Google Gemini, ChatGPT, Grok समेत अन्य AI टूल्स का दुरुपयोग कर आधार बायोमेट्रिक सुरक्षा प्रणाली को भी निशाना बना रहे हैं। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने बताया कि अपराधी सबसे पहले डेटा लीक, फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों का आधार नंबर, फोटो और मोबाइल संबंधी जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या UCL किट का दुरुपयोग कर आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदलने की कोशिश की जाती है। मोबाइल नंबर अपडेट होते ही ओटीपी अपराधियों तक पहुंचने लगते हैं और वे बैंकिंग, डिजिलॉकर व अन्य डिजिटल अकाउंट्स पर कब्जा कर सकते हैं।

पुलिस के मुताबिक अब अपराधी AI आधारित डीपफेक तकनीक से नकली वीडियो और चेहरे तैयार कर रहे हैं। इन वीडियो में आंखों की हरकतें और चेहरे के भाव इतने वास्तविक दिखते हैं कि कई फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम भी धोखा खा जाते हैं। इसका इस्तेमाल ई-केवाईसी, फर्जी बैंक खाते खोलने और अवैध लेनदेन में किया जा सकता है।

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राजस्थान पुलिस की सलाह-तुरंत यह कर लें

राजस्थान पुलिस ने लोगों से mAadhaar ऐप या UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आधार बायोमेट्रिक्स लॉक करने की अपील की है। बायोमेट्रिक्स लॉक होने पर फिंगरप्रिंट और आइरिस डेटा का दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा।
इसके साथ ही UIDAI पोर्टल पर नियमित रूप से आधार ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री चेक करने की सलाह दी गई है, ताकि यह पता चल सके कि आधार का इस्तेमाल कहां और कब हुआ।

पुलिस ने यह भी कहा है कि यदि आधार से जुड़े मोबाइल नंबर अपडेट या बदलाव का कोई संदिग्ध SMS मिले तो उसे नजरअंदाज न करें। आधार के साथ सक्रिय ईमेल आईडी लिंक रखना भी जरूरी बताया गया है, ताकि किसी भी बदलाव की तुरंत जानकारी मिल सके। राजस्थान पुलिस ने साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930, साइबर क्राइम पोर्टल या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।

 

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