महिला नेतृत्व और सफलता की कहानी: गुनीत मोंगा
गुनीत मोंगा ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने संघर्ष और ऑस्कर जीतने के सफर को साझा करते हुए भारतीय सिनेमा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "महिला नेतृत्व सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब हम निर्माण, निर्देशन और प्रोडक्शन में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि महिलाओं के लिए अवसर बढ़ रहे हैं और इंडस्ट्री में उनके योगदान को अब अधिक मान्यता मिल रही है।
आईफा का संकल्प 'हर आवाज होगी सुनी': नोरीन खान
आईफा की वाइस प्रेसिडेंट नोरीन खान ने इस मौके पर कहा, आईफा के 25 साल पूरे होने के अवसर पर, हम सिनेमा और अन्य क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ‘द जर्नी ऑफ वुमन इन सिनेमा’ केवल एक चर्चा नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। उन्होंने यह भी कहा कि जब हम हिम्मत, रचनात्मकता और नेतृत्व की कहानियाँ साझा करते हैं, तो हम केवल सफल महिलाओं का जश्न नहीं मनाते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते हैं।
नए दौर की ओर बढ़ता भारतीय सिनेमा
यह कार्यक्रम भारतीय सिनेमा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनके प्रभाव को उजागर करने वाला रहा। माधुरी दीक्षित और गुनीत मोंगा के प्रेरणादायक शब्दों ने इस बात को और पुख्ता किया कि भारतीय सिनेमा बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर मौजूद दर्शकों ने भी इस संवाद को प्रेरणादायक बताया और ‘मैं बदलाव ला सकती हूँ’ के संकल्प को एक सामूहिक शक्ति के रूप में अपनाने का संदेश दिया।