हीलियम गैस की आपूर्ति रुकने से एमआरआई मशीन ऑपरेशन का संकट
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राजस्थान के पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने कतर से हीलियम गैस की आपूर्ति बाधित होने के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार को यह जानकारी है कि एमआरआई मशीन के संचालन में हीलियम की कितनी अहम भूमिका होती है और इसके विकल्प के तौर पर क्या तैयारी की गई है।
दरअसल, एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) मशीन में उपयोग होने वाला सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट अत्यंत कम तापमान पर काम करता है, जिसे बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में हीलियम गैस की आवश्यकता होती है। यह तापमान लगभग माइनस 270 डिग्री सेल्सियस होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक एमआरआई मशीन में करीब 2000 लीटर हीलियम भरी जाती है। पहले इसकी कीमत लगभग 2000 रुपये प्रति लीटर थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात में इसमें भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
हाल ही में कतर में उत्पन्न तनाव और हमले की घटनाओं के कारण वैश्विक हीलियम सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कतर दुनिया का प्रमुख हीलियम निर्यातक देश है, ऐसे में आपूर्ति रुकने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में 150% तक की वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कीमतें 50% से 200% तक और बढ़ सकती हैं।
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इसका सीधा असर चिकित्सा सेवाओं पर पड़ रहा है। एमआरआई जांच की लागत में 35 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। अस्पतालों को सलाह दी गई है कि वे हीलियम का सीमित उपयोग करें और केवल अत्यावश्यक मामलों में ही एमआरआई जांच करें। कई अस्पतालों ने पहले ही अपने एमआरआई स्लॉट सीमित करना शुरू कर दिया है।
मेडिकल टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ नामित सोनी का कहना है कि यदि जल्द ही सप्लाई बहाल नहीं होती है, तो छोटे अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ेगा। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं महंगी होंगी बल्कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की जांच में भी देरी हो सकती है।