राजस्थान विधानसभा में खाद्य सुरक्षा योजना में नाम कटने और ई-केवाईसी नहीं होने के मुद्दे पर जोरदार बहस हुई। इस दौरान मंत्री सुमित गोदारा और कांग्रेस विधायक रामनिवास गावड़िया के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी बहस में शामिल हुए और मंत्री से उनकी तकरार हो गई।
गावड़िया ने आरोप लगाया कि विदेश या अन्य राज्यों में मजदूरी करने गए लोगों के नाम खाद्य सुरक्षा सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे गरीब परिवारों को राशन नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे जरूरतमंद परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
मंत्री का जवाब और कांग्रेस की आपत्ति
जवाब में मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि पात्र लोगों को वंचित नहीं किया जा रहा है और जो लोग विदेश में कमाई कर रहे हैं, उन्हें योजना का लाभ देना उचित नहीं है क्योंकि यह योजना गरीबों के लिए है।
इस पर कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मंत्री पद पर रहते हुए इस प्रकार की भाषा का उपयोग करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विदेश जाने वाले सभी लोग संपन्न नहीं होते, बल्कि गांवों के गरीब और किसानों के बेटे मजदूरी करने विदेश जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे परिवारों और बच्चों का क्या होगा, जिन्हें आयु संबंधी कारणों से भी राशन से वंचित किया जा रहा है। कांग्रेस विधायकों ने मंत्री से भाषण के बजाय ठोस जवाब देने की मांग की।
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‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ का उल्लेख
मंत्री गोदारा ने कहा कि वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत लाभार्थी देश में कहीं से भी राशन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने 75 लाख नए लाभार्थी जोड़े हैं और अभी 10 लाख नाम जोड़े जाने शेष हैं।
मंत्री के इस बयान पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि यदि 75 लाख नाम जोड़े गए हैं तो उतने ही नाम काटे भी गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिस योजना का उल्लेख किया जा रहा है, वह कांग्रेस सरकार के समय शुरू की गई थी। इसके जवाब में गोदारा ने कहा कि योजनाएं कांग्रेस लाती है, लेकिन उनका क्रियान्वयन भाजपा सरकार को करना पड़ता है।
स्पीकर को करना पड़ा हस्तक्षेप
बहस के दौरान सदन में शोर-शराबा बढ़ गया, जिसके बाद स्पीकर को हस्तक्षेप कर व्यवस्था बहाल करनी पड़ी। खाद्य सुरक्षा योजना को लेकर उठा यह मुद्दा सदन में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बना रहा।