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Jaipur News: बच्चों में बढ़ा दर्दनाक वायरल इन्फेक्शन, हैंड-फुट-माउथ डिजीज के मामले तेजी से सामने आ रहे

Sat, 23 Aug 2025 11:34 AM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Jaipur News: मानसून के मौसम में डेंगू-मलेरिया के साथ अब हैंड-फुट-माउथ डिजीज (HFMD) तेजी से बच्चों को अपनी चपेट में ले रही है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल के अनुसार, यह वायरल संक्रमण मुख्य रूप से 10 साल से कम उम्र के बच्चों में देखा जा रहा है।
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child specialist doctor - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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राजधानी जयपुर में इन दिनों बच्चों में मौसम जनित वायरल काफी फैल रहा है। इन दिनों  छोटे बच्चों में हैंड-फुट-माउथ डिजीज (HFMD) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह एक वायरल संक्रमण है जो ज्यादातर 10 साल से कम उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अनिल अग्रवाल का कहना है कि यह बीमारी कॉकसैकी वायरस और एंटरोवायरस के कारण होती है। यह वायरस संक्रमित बच्चे के खांसने-छींकने, थूक, नाक के स्राव, मल और संक्रमित खिलौनों या वस्तुओं के संपर्क में आने से फैलता है। बारिश के मौसम में नमी और गंदगी की वजह से यह संक्रमण और तेजी से फैलता है।
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कैसे पहचानें इस बीमारी को
  • शिशुरोग विशेषज्ञ डॉक्टर अनिल अग्रवाल का कहना है कि आमतौर पर हैंड-फुट-माउथ बीमारी के लक्षण थोड़े अलग होते हैं, अगर आपका बच्चा खाना खाते समय गले में दर्द की शिकायत करता है तो ये -हैंड-फुट-माउथ बीमारी के लक्षण हो सकते हैं इसके अलावा अन्य लक्षणों की बात करें तो
  • बच्चे को अचानक बुखार और गले में खराश हो जाए।
  • मुंह  के अंदर और जीभ पर छाले बन जाएं
  • हथेलियों और तलवों पर लाल दाने निकलें जो फफोले में बदल सकते हैं।
  • बच्चा भूख कम लगना, चिड़चिड़ापन और थकान जैसी परेशानी महसूस करे
  • ये सभी लक्षण दिखने पर माता-पिता को सतर्क हो जाना चाहिए और तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
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सावधानियां रखनी जरूरी
डॉक्टर अग्रवाल का कहना है कि HFMD आमतौर पर 5 से 7 दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन बच्चों को आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और साफ-सफाई बेहद जरूरी है। यह बीमारी ज्यादा गंभीर नहीं होती, लेकिन यदि बच्चे को लगातार तेज बुखार, बार-बार उल्टी, ज्यादा कमजोरी या पानी की कमी जैसी दिक्कत होतो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। इसके अलावा -
  •  बच्चों को बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
  •  संक्रमित बच्चों को कुछ दिनों तक स्कूल या डे-केयर न भेजें।
  •  बच्चों को दूषित पानी और बाहर का तैलीय भोजन खाने से बचाएं।
  •  खिलौनों और बच्चों की रोजाना इस्तेमाल की चीजों को साफ रखें।
  • अन्य बच्चों के संपर्क में आने से बचाएं। 
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