फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हनुमान बेनीवाल को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत: नागौर FIR मामले में कार्रवाई पर लगाई रोक

Sat, 11 Jul 2026 07:38 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक (Coercive) कार्रवाई पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।

 

विज्ञापन
हनुमान बेनीवाल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने नागौर जिले के पादू कलां थाने में दर्ज एफआईआर के मामले में अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ किसी भी तरह की सख्त या दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए हैं।

विज्ञापन


यह अंतरिम आदेश जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने बेनीवाल की उस आपराधिक विविध याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 8B के तहत दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है।

कोर्ट ने कहा- कई अहम कानूनी सवाल उठते हैं

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि मामला कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उठाता है, जिनकी विस्तृत न्यायिक समीक्षा आवश्यक है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों और एफआईआर की सामग्री के आधार पर यह जांचना जरूरी है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ व्यक्तिगत आपराधिक दायित्व तय करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं।
विज्ञापन


क्या है पूरा मामला?

यह मामला नागौर के पादू कलां थाने में 28 मई 2026 को दर्ज एफआईआर संख्या 119/2026 से जुड़ा है। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189(2), 223(a), 285 तथा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 8B के तहत दर्ज की गई थी।

एफआईआर के अनुसार, यह कार्रवाई 6 जनवरी को नागौर के रियान बड़ी में रेत माफिया के खिलाफ आयोजित राजनीतिक सभा और उसके बाद निकाले गए जुलूस के संबंध में की गई थी। इस मामले में हनुमान बेनीवाल सहित 13 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

यह भी पढें- Sri Ganganagar: ट्रक और कार की आमने-सामने की भिड़ंत बनी काल, भीषण सड़क हादसे में तीन युवकों की दर्दनाक मौत


'सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होना अपराध नहीं'

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी राजनीतिक सभा या जुलूस में भाग लेना मात्र किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी स्थापित नहीं करता। अदालत ने कहा कि यह देखना होगा कि बेनीवाल के खिलाफ ऐसे कौन से विशिष्ट तथ्य और साक्ष्य हैं, जिनके आधार पर उनके खिलाफ आपराधिक दायित्व तय किया जा सकता है।

विज्ञापन


राज्य सरकार से मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) उपस्थित हुए और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अदालत ने राज्य सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने का समय देते हुए अगली सुनवाई तक बेनीवाल के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। अब मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी, जिसमें राज्य सरकार का जवाब आने के बाद हाईकोर्ट याचिका के गुण-दोष के आधार पर आगे सुनवाई करेगा।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें