फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rajasthan: 'अविश्वास पर चर्चा करवाने से बेहतर होता धनखड़ की तरह बिरला से त्याग पत्र ले लेते', बेनीवाल ने कहा

Wed, 11 Mar 2026 09:56 PM IST
Himanshu Priyadarshi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Jaipur News: नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए संकल्प पर चर्चा में निष्पक्षता और संसदीय परंपराओं से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने विपक्ष की आवाज, छोटे दलों की भूमिका और सर्वदलीय बैठकों में भागीदारी को लेकर सवाल भी उठाए।
विज्ञापन
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल तथा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए संकल्प पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष के प्रति व्यक्तिगत विरोध का नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की मूल भावना, संविधान और संसदीय मर्यादाओं की रक्षा से जुड़ा विषय है। बेनीवाल ने कहा कि भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल्यों का संकल्प है, जिन पर देश का लोकतंत्र आधारित है।

विज्ञापन

 
उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का पद इन मूल्यों की रक्षा करने वाला एक तटस्थ और गरिमामय संस्थान माना जाता है। संविधान की भावना यह अपेक्षा करती है कि अध्यक्ष सदन के सभी पक्षों के साथ समान व्यवहार करें, चाहे वह सत्ता पक्ष हो या विपक्ष। उनके अनुसार अध्यक्ष का पद निष्पक्षता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रतीक होना चाहिए।
 
अध्यक्ष की निष्पक्षता पर उठाए प्रश्न
सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि पिछले कुछ समय में ऐसी परिस्थितियां बनी हैं जिनके कारण इस पद की निष्पक्षता को लेकर प्रश्न उठे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज को बार-बार दबाया जाना, महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के अवसरों का सीमित होना और संसदीय प्रक्रियाओं के संतुलन का कमजोर होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उनके अनुसार इन परिस्थितियों के कारण ही सदन में इस विषय पर चर्चा की आवश्यकता महसूस की गई है।
विज्ञापन

 
गृह मंत्री अमित शाह पर किया व्यंग्यात्मक कटाक्ष
सदन में बोलते हुए हनुमान बेनीवाल ने गृह मंत्री अमित शाह पर भी व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एक या दो सदस्य वाली पार्टी के सांसदों और निर्दलीय सांसदों की स्थिति ऐसी हो गई है जैसे ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में भारत सरकार की स्थिति हो गई है। उनके इस वक्तव्य को उन्होंने छोटे दलों और निर्दलीय सदस्यों की भूमिका के संदर्भ में रखा।

पढ़ें- Rajasthan News: राज्यसभा में गूंजा अरावली में अवैध खनन और वन कटाव का मुद्दा, सांसद नीरज डांगी ने जताई चिंता
 
सर्वदलीय बैठकों में नहीं बुलाने पर जताई नाराजगी
बेनीवाल ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा बुलाई जाने वाली बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) में एक सदस्यीय पार्टी के प्रतिनिधियों की भूमिका को शामिल नहीं किया जाता है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा आयोजित सर्वदलीय बैठकों में भी निर्दलीय सांसदों और एक या दो सदस्य वाली पार्टियों के प्रतिनिधियों को नहीं बुलाया जाता, जिससे उनकी भागीदारी सीमित हो जाती है।
विज्ञापन

 
उपराष्ट्रपति के संदर्भ में दिया उदाहरण
अपने वक्तव्य के दौरान हनुमान बेनीवाल ने कहा कि जिस प्रकार सरकार ने उपराष्ट्रपति धनखड़ को हटाया, उसी तरह यदि लोकसभा अध्यक्ष से त्यागपत्र ले लिया जाता तो इस विषय पर चर्चा की नौबत नहीं आती। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा किया जाता तो इस मुद्दे को लेकर सदन में विस्तृत बहस की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
 
 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें