राजस्थान के लिए रिफाइनरी का सपना साकार होता नजर आ रहा है। नए साल में जनवरी में ही राजस्थान को रिफाइनरी की सौगात मिलने की संभावना है। रिफाइनरी की टेस्टिंग पूरी हो गई है। रिफाइनरी की चिमनी से धुआं उठता देखा जा सकता है। संभावना है कि नए साल में 15 जनवरी के बाद पीएम नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करने पचपदरा आ सकते हैं।
यह देश की ऐसी पहली परियोजना
खान एवं पेट्रोलियम विभाग के सचिव टी. रविकांत ने बताया कि राजस्थान रिफाइनरी की खास बात यह है कि यह जीरो लिक्विड इफ्लुएंट डिस्चार्ज परियोजना है, जिसका सीधा-सीधा मतलब है कि इस रिफाइनरी में प्रसंस्करण के दौरान किसी तरह का वेस्टेज नहीं होगा।
पचपदरा तक 12 किमी की रेल लाइन बिछेगी
टी. रविकांत ने जानकारी दी कि बालोतरा से पचपदरा तक 12 किमी रेलवे लाइन तथा पचपदरा से रिफाइनरी साइट तक एचआरआरएल द्वारा रेलवे लाइन बिछाई जाएगी। रिफाइनरी से प्रदेश में निवेश, रोजगार और राजस्व के नए अवसर होंगे। इसके अलावा यहां बिजली सब-स्टेशन का काम भी जल्द शुरू होगा। रेलवे द्वारा राजस्थान के महत्वपूर्ण क्षेत्र बालोतरा से पचपदरा को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए नई लाइन के कार्य हेतु फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) को मंजूरी प्रदान की गई है। यह रेल लाइन पचपदरा को बालोतरा, बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी। साथ ही क्षेत्र का जोधपुर, अहमदाबाद, दिल्ली तथा जयपुर की ओर भी संपर्क स्थापित होगा।
कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी रिफाइनरी
रिफाइनरी परियोजना राजस्थान और देश के लिए एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक सपना रही है, जिसकी यात्रा दो दशकों में कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी है।
शुरुआत (2005-2013)
वर्ष 2005 में इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपए रखी गई थी। इसके बाद 2013 में अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में पचपदरा में एचपीसीएल के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और शिलान्यास किया गया। उस समय परियोजना की लागत बढ़कर 37,320 करोड़ रुपए हो गई और इसकी वार्षिक क्षमता 90 लाख टन तय की गई।
राजे सरकार में नए एमओयू (2013-2017)
वसुंधरा राजे सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछली सरकार के समझौते की शर्तों पर सवाल उठाए गए। इसके बाद 2017 में एचपीसीएल के साथ नया समझौता हुआ, जिसमें राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले ब्याज-मुक्त ऋण की राशि में बड़ा बदलाव किया गया और इसे 3,736 करोड़ रुपए से घटाकर 1,123 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष कर दिया गया।
2018 में पीएम मोदी ने किया शिलान्यास (2018-2025)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में परियोजना स्थल का उद्घाटन किया। इसके बाद काम ने गति पकड़ी और 2025 तक परियोजना का 88 से 96 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। कई प्रमुख प्रोसेस यूनिट्स का निर्माण 94 से 98 प्रतिशत तक पूरा बताया जा रहा है।
वर्तमान स्थिति (2025)