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नए साल से पहले खुशखबरी: राजस्थान रिफाइनरी के लिए क्रूड की पहली खेप मूंदड़ा पोर्ट पहुंची,जानें क्या थी अड़चनें?

Fri, 26 Dec 2025 09:19 PM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट पचपदरा रिफाइनरी का करीब 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। कच्चे तेल की पहली खेप पहुंचने के साथ टेस्टिंग प्रक्रिया शुरू हो गई है। संभावना है कि जनवरी के दूसरे पखवाड़े में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे।
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राजस्थान को रिफाइनरी की सौगात को लेकर उत्साह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के लिए रिफाइनरी का सपना साकार होता नजर आ रहा है। नए साल में जनवरी में ही राजस्थान को रिफाइनरी की सौगात मिलने की संभावना है। रिफाइनरी की टेस्टिंग पूरी हो गई है। रिफाइनरी की चिमनी से धुआं उठता देखा जा सकता है। संभावना है कि नए साल में 15 जनवरी के बाद पीएम नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करने पचपदरा आ सकते हैं।

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समग्र रूप से 90.3 प्रतिशत कार्य पूरा
रिफाइनरी के लिए मुंद्रा पोर्ट पर अरब मिक्स से क्रूड टैंक (सीओटी) तक रिफाइनरी के लिए कच्चे तेल की पहली खेप आ गई है और यह मुंद्रा पोर्ट के 6 टैंकों से पाइपलाइन के माध्यम से रिफाइनरी तक पहुंचेगी। वहीं, राजस्थान के जैसलमेर से निकलने वाला क्रूड रिफाइनरी तक पहुंच चुका है। रिफाइनरी में ओबीई कार्य 99.8 प्रतिशत पूरा हो चुका है। राजस्थान रिफाइनरी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कमलाकर आर. विखार व सीएफओ इन्द्रजीत दासगुप्ता ने बताया कि राजस्थान रिफाइनरी (एचआरआरएल) में समग्र रूप से 90.3 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जिसमें रिफाइनरी इकाई का 96.4 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

यह देश की ऐसी पहली परियोजना

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राजस्थान रिफाइनरी राजस्थान सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट होने के साथ ही देश की ऐसी पहली परियोजना है, जिसमें रिफाइनरी के साथ ही पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी है। राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में रिफाइनरी को लेकर गठित राज्यस्तरीय टास्क फोर्स की 7वीं बैठक में यह जानकारी दी गई कि रिफाइनरी का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

सीएमडी एचपीसीएल विकास कौशल ने बताया कि रिफाइनरी में मेहसाना-भटिंडा गैस पाइपलाइन (एमबीपीएल) से गैस आना शुरू होने के साथ ही फ्लेयर सिस्टम शुरू हो गया है, जिससे टेस्टिंग प्रक्रिया आरंभ हो गई है। उन्होंने बताया कि रिफाइनरी के नाचना रिजर्व से पाइपलाइन द्वारा पानी आने लगा है।

खान एवं पेट्रोलियम विभाग के सचिव टी. रविकांत ने बताया कि राजस्थान रिफाइनरी की खास बात यह है कि यह जीरो लिक्विड इफ्लुएंट डिस्चार्ज परियोजना है, जिसका सीधा-सीधा मतलब है कि इस रिफाइनरी में प्रसंस्करण के दौरान किसी तरह का वेस्टेज नहीं होगा।

पचपदरा तक 12 किमी की रेल लाइन बिछेगी
टी. रविकांत ने जानकारी दी कि बालोतरा से पचपदरा तक 12 किमी रेलवे लाइन तथा पचपदरा से रिफाइनरी साइट तक एचआरआरएल द्वारा रेलवे लाइन बिछाई जाएगी। रिफाइनरी से प्रदेश में निवेश, रोजगार और राजस्व के नए अवसर होंगे। इसके अलावा यहां बिजली सब-स्टेशन का काम भी जल्द शुरू होगा। रेलवे द्वारा राजस्थान के महत्वपूर्ण क्षेत्र बालोतरा से पचपदरा को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए नई लाइन के कार्य हेतु फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) को मंजूरी प्रदान की गई है। यह रेल लाइन पचपदरा को बालोतरा, बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी। साथ ही क्षेत्र का जोधपुर, अहमदाबाद, दिल्ली तथा जयपुर की ओर भी संपर्क स्थापित होगा।

कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी रिफाइनरी
रिफाइनरी परियोजना राजस्थान और देश के लिए एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक सपना रही है, जिसकी यात्रा दो दशकों में कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी है।

शुरुआत (2005-2013)
वर्ष 2005 में इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपए रखी गई थी। इसके बाद 2013 में अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में पचपदरा में एचपीसीएल के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और शिलान्यास किया गया। उस समय परियोजना की लागत बढ़कर 37,320 करोड़ रुपए हो गई और इसकी वार्षिक क्षमता 90 लाख टन तय की गई।

राजे सरकार में नए एमओयू (2013-2017)
वसुंधरा राजे सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछली सरकार के समझौते की शर्तों पर सवाल उठाए गए। इसके बाद 2017 में एचपीसीएल के साथ नया समझौता हुआ, जिसमें राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले ब्याज-मुक्त ऋण की राशि में बड़ा बदलाव किया गया और इसे 3,736 करोड़ रुपए से घटाकर 1,123 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष कर दिया गया।

2018 में पीएम मोदी ने किया शिलान्यास (2018-2025)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में परियोजना स्थल का उद्घाटन किया। इसके बाद काम ने गति पकड़ी और 2025 तक परियोजना का 88 से 96 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। कई प्रमुख प्रोसेस यूनिट्स का निर्माण 94 से 98 प्रतिशत तक पूरा बताया जा रहा है।

वर्तमान स्थिति (2025)

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फिलहाल गैस सप्लाई शुरू हो चुकी है, फ्लेयर सिस्टम के चालू होने के साथ टेस्टिंग प्रक्रिया जारी है। रिफाइनरी के लिए मुंद्रा पोर्ट पर अरब मिक्स से क्रूड टैंक (सीओटी) तक कच्चे तेल की पहली खेप आ गई है और यह मुंद्रा पोर्ट के 6 टैंकों से पाइपलाइन के माध्यम से रिफाइनरी तक पहुंचेगी। मार्च 2026 तक इसका वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

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जानें क्या था मुख्य विवाद? 
परियोजना की लागत 12,000 करोड़ रुपए से बढ़कर करीब 1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने के अनुमान ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया। एचपीसीएल और राज्य सरकार के बीच समझौतों में बदलाव, समय-सीमा में देरी और ‘डबल इंजन सरकार’ के बावजूद काम की रफ्तार को लेकर अशोक गहलोत और भाजपा नेताओं के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे। बार-बार तय समय पर उत्पादन शुरू न होने से जनता में भी संशय बना रहा। कुल मिलाकर, यह परियोजना अब अंतिम चरण में है, लेकिन इसकी लंबी यात्रा राजनीतिक खींचतान, वित्तीय बदलावों और देरी की वजह से लगातार चर्चा और विवाद का विषय बनी रही है।

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