सीकर के छात्र प्रदीप मेघवाल सुसाइड मामले में एनएसयूआई ने परिवार को 11 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि यह राशि पढ़ाई के लिए लिए गए कर्ज को चुकाने में मदद करेगी। राहुल गांधी ने भी परिवार से फोन पर बात कर न्याय का भरोसा दिया।
नीट पेपर लीक मामले से जुड़ी अनियमितताओं के बीच राजस्थान के सीकर निवासी छात्र प्रदीप मेघवाल की आत्महत्या का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब इस मामले में एनएसयूआई ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रदीप के परिवार को 11 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि यह राशि परिवार पर शिक्षा के लिए चढ़े कर्ज को चुकाने में मदद करेगी।
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डॉक्टर बनने का सपना टूटा, तनाव में उठाया आत्मघाती कदम
जानकारी के अनुसार प्रदीप मेघवाल के परिवार ने उसकी पढ़ाई और नीट परीक्षा की तैयारी के लिए लाखों रुपये का कर्ज लिया था। परिवार को उम्मीद थी कि प्रदीप डॉक्टर बनकर घर की आर्थिक स्थिति बदलेगा, लेकिन नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सामने आई कथित अनियमितताओं ने उसके सपनों को झकझोर दिया। बताया जा रहा है कि इसी मानसिक तनाव और निराशा के बीच प्रदीप ने आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
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राहुल गांधी ने फोन पर की परिवार से बात
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने हाल ही में प्रदीप के परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी परिवार की फोन पर बातचीत करवाई। राहुल गांधी ने परिजनों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया और कहा कि इस कठिन समय में पूरा संगठन परिवार के साथ खड़ा है।
कार्यकर्ताओं के सहयोग से जुटाई गई सहायता राशि
एनएसयूआई के अनुसार देशभर के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के सहयोग से 11 लाख रुपये की राशि एकत्रित की गई है। यह सहायता राशि 26 मई 2026 को परिवार को सौंपी जाएगी। संगठन का कहना है कि यह केवल एक छात्र या परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि देशभर के मेहनती छात्रों के भविष्य और न्याय की लड़ाई है।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग
एनएसयूआई ने कहा कि जब तक प्रदीप मेघवाल को न्याय नहीं मिलता और नीट पेपर लीक मामले के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की है।