जयपुर में चिकित्सकों और अधिवक्ताओं के बीच चल रहा विवाद अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। डॉ. सोनदेव बंसल की जमानत याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर बेंच में सुनवाई के दौरान कथित हंगामे और उसके बाद हुई घटनाओं के विरोध में निजी चिकित्सा संगठनों ने गुरुवार रात 8 बजे से निजी चिकित्सा सेवाओं के अनिश्चितकालीन बहिष्कार की घोषणा कर दी है। इस फैसले से राजधानी जयपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
आईएमए जयपुर के जोनल सेक्रेटरी डॉ. अनुराग शर्मा के अनुसार हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों द्वारा कोर्टरूम में नारेबाजी और हंगामा किया गया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित हुई और सुनवाई 11 मई तक स्थगित करनी पड़ी। चिकित्सक संगठनों का आरोप है कि इसके बाद कुछ अधिवक्ताओं ने डॉ. सोनदेव बंसल के पिता और भाई को रोककर बार रूम में ले जाकर उनके साथ अभद्र व्यवहार, धमकी और मारपीट की।
कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
निजी अस्पताल नर्सिंग होम एसोसिएशन के सचिव डॉ. राकेश कालरा ने कहा कि 75 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति के साथ इस प्रकार का व्यवहार बेहद निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक डॉ. बंसल की रिहाई नहीं होती और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आईएमए जयपुर ब्रांच के महासचिव डॉ. अनुराग तोमर ने आरोप लगाया कि पहले सेशन कोर्ट और अब हाईकोर्ट में भी जमानत सुनवाई के दौरान दबाव बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों और उनके परिवारों के साथ इस तरह का व्यवहार पूरे चिकित्सा समुदाय के लिए चिंता का विषय है।
सितंबर 2025 के मामले से जुड़ा है पूरा विवाद
गौरतलब है कि सितंबर 2025 में जयपुर के निविक अस्पताल में आरजीएचएस योजना के तहत एक अधिवक्ता की मां का उपचार हुआ था, जिनकी इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। मामले की जांच के लिए गठित मेडिकल बोर्ड ने उपचार में किसी प्रकार की चिकित्सीय लापरवाही नहीं मानी थी। इसके बावजूद आरजीएचएस से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आधार पर डॉ. सोनदेव बंसल के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया।
इस प्रकरण के बाद से चिकित्सक संगठनों और अधिवक्ताओं के बीच तनाव लगातार बना हुआ है, जो अब खुले विरोध और बहिष्कार तक पहुंच गया है।
ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी सेवाओं तक बहिष्कार का फैसला
आईएमए, जेएमए, उपचार और पीएचएनएचएस सहित कई चिकित्सा संगठनों ने संयुक्त रूप से ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी सेवाओं तक के बहिष्कार का निर्णय लिया है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन पूरे राजस्थान में फैलाया जाएगा।
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चिकित्सक संगठनों ने डॉक्टरों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, न्यायिक प्रक्रिया में व्यवधान डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने और अस्पतालों व कोर्ट परिसर में भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही कुछ संगठनों ने अधिवक्ताओं और उनके परिवारों को निजी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने का भी निर्णय लिया है।
चिकित्सा मंत्री ने अस्पताल बंद नहीं करने की अपील की
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इस पूरे विवाद को दो समुदायों के बीच का मामला बताते हुए कहा कि डॉक्टरों को अस्पताल बंद नहीं करने चाहिए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में पीड़ा में आए मरीजों का इलाज सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और बहिष्कार से आमजन को परेशानी होगी। मंत्री ने चिकित्सकों से पुनर्विचार की अपील की है।