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Rajasthan IAS Corruption: राजस्थान में आईएएस पर भ्रष्टाचार के दाग; सुबोध सहित कई अफसर हो चुके हैं गिरफ्तार

Fri, 10 Apr 2026 11:53 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

जेजेएम घोटाले में सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद राजस्थान में आईएएस अफसरों से जुड़े भ्रष्टाचार के पुराने मामले फिर चर्चा में हैं। पहले भी कई अधिकारी रिश्वत और घोटालों में एसीबी कार्रवाई का सामना कर चुके हैं।

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राजस्थान में पहले भी कई आईएएस अधिकारी रिश्वत और घोटालों के आरोप में गिरफ्तार हो चुके हैं। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर प्रदेश में प्रशासनिक सेवा के भीतर भ्रष्टाचार के मामलों पर चर्चा तेज हो गई है। इससे पहले भी कई आईएएस अधिकारी रिश्वत और घोटालों के आरोप में गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें पूर्व आईएएस इंद्र सिंह राव, पूर्व कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया, पूर्व आईएएस इंद्र सिंह राव ऐसे पहले अफसरों में शामिल रहे हैं, जिन पर कलेक्टर रहते हुए रिश्वत लेने का आरोप लगा। 
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इसी तरह, नीरज के पवन को 2016 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) घोटाले में एसीबी ने गिरफ्तार किया था। उन पर फर्जी तरीके से टेंडर दिलाने और दलालों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगे थे। वे करीब दो साल तक निलंबित भी रहे।  एनआरएचएम (NRHM) रिश्वत मामले में गिरफ्तार होने के बाद वे लगभग 8 महीने तक जेल में रहे। उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा 30 मई 2016 को गिरफ्तार किया गया था और जनवरी 2017 के अंत में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वे फरवरी 2017 में जेल से बाहर आए।

अलवर के पूर्व कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया को भी एसीबी ने 5 लाख रुपये की रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया था। उनके साथ एक आरएएस अधिकारी और एक दलाल को भी पकड़ा गया था। पहाड़िया 67 दिनों तक जेल में रहे। अप्रैल 2022 में अलवर कलेक्टर रहते हुए एसीबी द्वारा 5 लाख रुपये की रिश्वत मामले में ट्रैप किए जाने के बाद, वे दो महीने से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आए थे।
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यह भी पढें- राजस्थान जल जीवन मिशन घोटाला: एसीबी की बड़ी कार्रवाई; फरार पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल दिल्ली से गिरफ्तार

2014 के चर्चित महाघूसकांड में रिटायर्ड आईएएस अशोक सिंघवी का नाम सामने आया था। खनन पट्टों के आवंटन में कथित तौर पर भारी भ्रष्टाचार और करोड़ों रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में उन्हें 2015 में गिरफ्तार किया गया था। चर्चित खान महाघूसकांड में लगभग 221 दिन जेल में रहने के बाद 23-24 अप्रैल 2016 को जयपुर की केंद्रीय जेल से बाहर आए थे। राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर) ने उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के मामले में जमानत दी थी।

वहीं, आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा को 2019 में गेहूं घोटाले में एसीबी ने गिरफ्तार किया था। जांच में उनकी कई बेनामी संपत्तियां भी सामने आई थीं, जिन्हें अटैच किया गया। करीब 8 करोड़ रुपये के गेहूं घोटाले के आरोप में फंसी निलंबित आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा मई 2018 में सरेंडर करने के बाद लगभग दो महीने तक जोधपुर जेल में रहीं। उन्हें जुलाई 2018 में हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।
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अब जेजेएम घोटाले में सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाए। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से सिस्टम की साख पर भी असर पड़ रहा है।
 
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