सार
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बढ़ती कीमतों को लेकर बीजेपी सरकारों पर हमला बोला। कांग्रेस ने महंगाई, ईंधन संकट और वैट नीति को लेकर सरकार से पारदर्शिता और राहत देने की मांग की।
पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की बढ़ती कीमतों को लेकर राजस्थान में सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकारों पर हमला बोलते हुए महंगाई और ईंधन संकट को लेकर सरकार को घेरा है।
अशोक गहलोत ने कहा कि सरकार जनता को वास्तविक स्थिति बताने के बजाय “तमाशा” कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद बीजेपी नेता और मुख्यमंत्री रिक्शा में सफर करने, पैदल चलने या इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करने जैसे प्रतीकात्मक कदम दिखा रहे हैं, लेकिन इससे आम लोगों को कोई राहत नहीं मिल रही।
गहलोत ने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की वजह से ईंधन कीमतें बढ़ रही हैं तो केंद्र सरकार को साफ तौर पर देश के सामने स्थिति रखनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान के कई इलाकों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कोटा, जयपुर, जोधपुर और भरतपुर जैसे शहरों के बीच यात्रा करने वाले लोगों को रास्ते में कई बार कम मात्रा में ईंधन भरवाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जमीनी हालात स्वीकार करने के बजाय लगातार संकट से इनकार कर रही है।
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गहलोत ने राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष मदन राठौड़ और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों में एलपीजी सिलेंडर की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि एलपीजी वितरकों को भी उपभोक्ताओं के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी पेट्रोल-डीजल पर वैट को लेकर राज्य सरकार को घेरा। जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के 2021 के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष में रहते हुए बीजेपी वैट कम करने की मांग करती थी, लेकिन अब सत्ता में आने के बाद राजस्थान में ईंधन की कीमतें देश में सबसे ज्यादा हैं।
जूली ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कीमतें बढ़ाने के बाद राज्य सरकार की वैट आय भी बढ़ी है, इसलिए जनता को राहत देने के लिए वैट कम किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अतिरिक्त राजस्व मिलने के बावजूद सरकार आम लोगों को राहत देने में विफल रही है।
ईंधन कीमतों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब पेट्रोलियम डीलर्स भी वैट में कटौती की मांग कर चुके हैं। इससे राजस्थान में महंगाई और ईंधन संकट का मुद्दा राजनीतिक रूप से और गर्मा गया है।