एसीबी पर किरोड़ी के आरोपों को लेकर कांग्रेस हमलावर
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राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा द्वारा एसीबी पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने सरकार की कार्यप्रणाली तथा उसके भीतर चल रहे कथित सत्ता संघर्ष पर सवाल उठाए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की एसीबी मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता ने भाजपा सरकार की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है। गहलोत ने कहा कि मंत्री ने एसीबी पर उन्हें किसी दबाव में फंसाने का आरोप लगाया है और एसीबी को पॉलिटिकल वेपन यानी राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की बात कही है।
गहलोत ने सवाल उठाया कि एसीबी सीधे मुख्यमंत्री के अधीन कार्य करती है, ऐसे में क्या कृषि मंत्री अप्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री पर ही उन्हें फंसाने का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है कि वे जनता को स्पष्ट करें कि इस पूरे मामले की वास्तविकता क्या है। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि क्या कृषि मंत्री रिश्वत प्रकरण में संलिप्त हैं या फिर एसीबी उनके खिलाफ किसी दबाव में कार्रवाई कर रही है।
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वहीं कांग्रेस नेता प्रतापसिंह खाचरियावास ने भी इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा सरकार की विफलता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जब राज्य का एक कैबिनेट मंत्री स्वयं एसीबी कार्यालय पहुंचकर यह कहने को मजबूर हो जाए कि यदि वह दोषी है तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाए, तो इससे सरकार की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजस्थान में सरकार नहीं बल्कि सर्कस चल रहा है।
खाचरियावास ने कहा कि मुख्यमंत्री को प्रदेश की जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर उनकी ही सरकार का मंत्री किसके खिलाफ संघर्ष कर रहा है और किससे न्याय मांग रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मंत्री स्वयं षड्यंत्र की बात कर रहे हैं तो यह भाजपा सरकार के भीतर गुटबाजी, अविश्वास और सत्ता संघर्ष का संकेत है। उन्होंने बीज निगम के निदेशक की नियुक्ति का मुद्दा भी उठाया और कहा कि जिस व्यक्ति की नियुक्ति की गई, उसके पास से करोड़ों रुपये की राशि बरामद होने की बात सामने आई है। यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं बल्कि सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जनता के सामने तथ्य रखने की मांग की है। राजनीतिक हलकों में इस विवाद को भाजपा सरकार के भीतर बढ़ते मतभेदों और प्रशासनिक समन्वय पर उठते सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है।