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मानगढ़ धाम: केंद्र के फैसले से सियासी संग्राम, गहलोत ने याद दिलाया PM मोदी का वादा, क्या बोले रोत?

Tue, 04 Aug 2026 07:02 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Rajasthan News: मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने से केंद्र सरकार के इनकार के बाद राजस्थान की राजनीति तेज हो गई है। सांसद राजकुमार रोत ने इसे आदिवासी समाज का अपमान बताया है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने वादे का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं।

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अशोक गहलोत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान-गुजरात सीमा पर स्थित ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने से केंद्र सरकार के इनकार के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत ने केंद्र सरकार के फैसले को आदिवासी समाज के बलिदान का अपमान बताया है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने वादे का हवाला देते हुए सरकार से जवाब मांगा है। दोनों नेताओं ने इस मुद्दे को आदिवासी अस्मिता और इतिहास से जुड़ा बताते हुए भाजपा सरकार को घेरा है।

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'शहीद आदिवासियों का हुआ अपमान'
बांसवाड़ा-डूंगरपुर से सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि 1913 के मानगढ़ नरसंहार में शहीद हुए 1,500 से अधिक भील आदिवासियों के बलिदान का केंद्र सरकार ने अपमान किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आदिवासी गौरव की बात तो करती है, लेकिन मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय पहचान देने से पीछे हट गई। रोत ने केंद्र सरकार से अपना फैसला वापस लेने और मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की।

गहलोत ने PM मोदी के पुराने वादे की दिलाई याद
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मानगढ़ धाम दौरे के दौरान यह संदेश गया था कि इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलेगा। गहलोत ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से आगे बढ़ाया था और वर्ष 2022 में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) ने भी इसकी सिफारिश की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सकारात्मक सिफारिश मौजूद थी तो अब केंद्र सरकार ने इसे क्यों खारिज कर दिया।
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केंद्र ने बताया क्यों नहीं मिल सकता राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा
लोकसभा में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए पहले अभ्यावेदन प्राप्त हुए थे। हालांकि निरीक्षण में पाया गया कि स्थल पर बड़े पैमाने पर आधुनिक निर्माण और विकास कार्य हो चुके हैं। ऐसे में यह प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 (AMASR Act) के तहत राष्ट्रीय महत्व के स्मारक घोषित किए जाने के मानकों पर खरा नहीं उतरता। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

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आदिवासी राजनीति में फिर बना बड़ा मुद्दा
मानगढ़ धाम राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों की आस्था और इतिहास का प्रमुख केंद्र माना जाता है। 17 नवंबर 1913 को गोविंद गुरु के नेतृत्व में एकत्र भील आदिवासियों पर ब्रिटिश सेना की गोलीबारी में करीब 1,500 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना को 'आदिवासियों का जलियांवाला बाग' कहा जाता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार के इस फैसले को विपक्ष आगामी चुनावों में आदिवासी अस्मिता के मुद्दे के रूप में जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है।

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