राजस्थान में नगर निकाय चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी में टिकट वितरण की कवायद तेज हो गई है। लेकिन टिकट तय करने से पहले ही जयपुर संभाग में पार्टी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जयपुर संभाग राजनीतिक रूप से भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस संभाग में प्रदेश के कई बड़े जिले शामिल हैं और पार्टी के कई दिग्गज नेताओं का राजनीतिक आधार भी यहीं है।
जयपुर संभाग में दिग्गजों का दबदबा
प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जयपुर से आते हैं। प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री भी जयपुर से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा कई कैबिनेट मंत्री और संगठन के प्रभावशाली नेता जयपुर संभाग से आते हैं। प्रदेश की राजनीति में 'बाबा' के नाम से पहचाने जाने वाले एक कैबिनेट मंत्री भी जयपुर संभाग से हैं। वहीं केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने वाले केंद्रीय मंत्री भी जयपुर संभाग से आते हैं। ऐसे में इस पूरे संभाग में टिकट वितरण भाजपा के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण चुनौती माना जा रहा है।
रात 9 बजे बैठक, उससे पहले ही बढ़ी हलचल
इसी बीच भाजपा में जयपुर संभाग की बैठक को लेकर भी खास नजर बनी हुई है। जानकारी के मुताबिक, जयपुर संभाग की बैठक रात नौ बजे प्रस्तावित है। बैठक में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए संभावित प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा और संगठन स्तर पर राय-मशविरा होना है। हालांकि, बैठक शुरू होने से पहले ही एक विधायक को लेकर विवाद की स्थिति सामने आने की चर्चा है।
विधायक ने 16 प्रत्याशियों को माला पहनाकर दिया समर्थन!
सूत्रों के मुताबिक, जयपुर के एक विधायक ने संभागीय बैठक से पहले ही अपने स्तर पर करीब 16 प्रत्याशियों को माला पहनाकर उन्हें अपना समर्थन दे दिया। बताया जा रहा है कि विधायक की ओर से इन प्रत्याशियों को ही अंतिम मानने का संदेश भी दिया गया। हालांकि, इन नामों पर पार्टी की औपचारिक बैठक और संगठनात्मक स्तर पर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।
शिकायत लेकर भाजपा मुख्यालय पहुंचे बड़े नेता
इस घटनाक्रम की शिकायत लेकर कुछ बड़े नेता भाजपा मुख्यालय पहुंचे। इसके बाद मामला पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार, जब विधायक से इस पूरे मामले को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कथित तौर पर यहां तक कह दिया कि वह इस्तीफा देने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन प्रत्याशियों में बदलाव नहीं होगा।
बैठक से पहले नाम तय करना संगठन के लिए चुनौती?
अगर यह घटनाक्रम सही साबित होता है तो यह भाजपा के लिए गंभीर संगठनात्मक चुनौती हो सकती है। दरअसल, टिकट वितरण के दौरान पार्टी सामान्य तौर पर स्थानीय समीकरण, संगठन की राय, जीत की संभावना, सामाजिक समीकरण और वरिष्ठ नेताओं के सुझावों को ध्यान में रखकर फैसला करती है। ऐसे में बैठक से पहले ही प्रत्याशियों को सार्वजनिक रूप से समर्थन देने की स्थिति पार्टी के लिए असहज मानी जा सकती है।
जयपुर संभाग में हर टिकट पर बड़े नेताओं की नजर
जयपुर संभाग में पहले से ही टिकट को लेकर कई स्तरों पर दावेदारियां और राजनीतिक समीकरण बनने लगे हैं। बड़े नेताओं की मौजूदगी के कारण यहां प्रत्येक टिकट का फैसला स्थानीय राजनीति के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर भी संदेश देने वाला होगा।
16 नामों पर समझौता होगा या नए सिरे से मंथन?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा इस पूरे विवाद को किस तरह डील करती है? क्या पार्टी विधायक द्वारा घोषित बताए जा रहे 16 नामों को लेकर कोई समझौता करेगी, या संगठन की बैठक में नए सिरे से नामों पर मंथन होगा? क्या विधायक की कथित इस्तीफे की पेशकश के बाद पार्टी नेतृत्व उन्हें समझाने में सफल होगा? इन सवालों के जवाब जयपुर संभाग की रात नौ बजे होने वाली बैठक के बाद सामने आने की उम्मीद है।