भैराणा धाम में संत समाज का आंदोलन लगातार जारी है। इस बीच दादू धाम संघर्ष समिति ने एक पत्र जारी कर आंदोलन और सरकार के साथ हुई वार्ताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है। समिति का कहना है कि 26 मई 2026 को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी थी, लेकिन अगले दिन प्रशासनिक प्रतिनिधियों की ओर से उन विषयों पर कोई ठोस चर्चा नहीं की गई।
संत समाज को लिखित आश्वासन नहीं मिला
संघर्ष समिति द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 27 मई को जिन मुद्दों पर सहमति बनी थी, उन्हें लेकर अब तक संत समाज को कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया है। संतों का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से स्पष्ट और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनकी चिंताएं बनी रहेंगी और आंदोलन जारी रहेगा।
राजनीतिक बयानबाजी से कोई संबंध नहीं
पत्र में संत समाज ने यह भी स्पष्ट किया कि 27 मई को मंच से हुई राजनीतिक बयानबाजी का उनके आंदोलन से कोई संबंध नहीं है। संतों ने दोहराया कि उनका संघर्ष केवल धार्मिक और सामाजिक मांगों को लेकर है तथा वे किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहते।
संतों का प्रतिनिधिमंडल जयपुर पहुंचा
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे स्वयं मामले को गंभीरता से लेते हुए बिंदुवार चर्चा करवाएं और संत समाज की मांगों का स्थायी समाधान सुनिश्चित करें। इसी उद्देश्य से संतों का एक प्रतिनिधिमंडल जयपुर पहुंचा और मंत्रियों से मुलाकात की।
प्रशासनिक स्तर पर कमजोर हुआ भरोसा
बैठक के बाद संतों ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर उनका भरोसा कमजोर हुआ है, इसलिए सरकार द्वारा गठित कैबिनेट मंत्री समिति ही उनसे सीधे संवाद करे। संत समाज की इस मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने समिति में मंत्री सुमित गोदारा और गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेडम को शामिल किया है।
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प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल
संतों की मांग है कि मंत्री समिति भैराणा धाम पहुंचकर सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा करें और समाधान की दिशा में ठोस पहल करें। वहीं, आंदोलन राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय बना हुआ है। 27 मई को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) द्वारा आयोजित धरना-प्रदर्शन के बाद इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है।
इसी क्रम में संत प्रतिनिधियों ने नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल से उनके आवास पर मुलाकात की। बैठक के बाद बेनीवाल ने संत समाज को समर्थन देने का आश्वासन दिया। हालांकि संत समुदाय के रतन महाराज ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य अपनी मांगों का समाधान है और राजनीतिक बयानबाजी से उनका कोई सरोकार नहीं है।