हनुमानगढ़ के टिब्बी क्षेत्र के चक 5 आरके गांव में प्रस्तावित 400 करोड़ रुपये की एथेनॉल फैक्टरी को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को हिंसक रूप ले लिया। राठीखेड़ा गांव सहित 15 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। तनाव को देखते हुए बीकानेर और श्रीगंगानगर से आरएसी और क्विक रेस्पॉन्स टीम की अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी गई है। पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है।
डेढ़ साल से चल रहा किसानों का धरना
ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि फैक्टरी के संचालन से प्रदूषण स्तर बढ़ेगा, भूजल दूषित हो जाएगा और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे उत्पन्न होंगे। इसी आशंका के चलते किसान डेढ़ साल से लगातार धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि 15 महीनों से वे विरोध जता रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने उनकी चिंताओं को अनदेखा किया। किसानों का दावा है कि फैक्टरी का अपशिष्ट जल मिट्टी और भूजल को बुरी तरह प्रभावित करेगा, जिससे हजारों एकड़ खेती बर्बाद हो जाएगी। इसके अलावा वायु प्रदूषण से सांस संबंधी बीमारियां बढ़ने का खतरा भी है।
मंगलवार तड़के हुई किसान नेताओं की गिरफ्तारी
मंगलवार तड़के पुलिस ने किसान नेता महंगा सिंह सहित 12 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। विरोध में विधायक अभिमन्यु पूनिया सहित 70 से अधिक लोगों ने सामूहिक गिरफ्तारी दी, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। गिरफ्तारियों के खिलाफ किसानों ने चक 5 आरके और आसपास के इलाकों में जुलूस निकाले, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
बाहरी इलाकों में नाकाबंदी, भारी पुलिस बल तैनात
स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन ने बाहरी मार्गों पर नाकाबंदी कर दी ताकि अन्य गांवों के लोग घटनास्थल पर न पहुंच सकें। टिब्बी एसडीएम कार्यालय और आसपास के क्षेत्रों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। इंटरनेट सेवाओं को बंद करने का फैसला भी इसी तनाव को कम करने के लिए लिया गया। शाम तक इलाके में हलचल बनी रही, लेकिन कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
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शाम को वार्ता में बनी कलेक्टर के साथ बैठक की सहमति
शाम को टिब्बी एसडीएम और पुलिस अधिकारियों ने किसान प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की। इस दौरान किसानों ने अपनी मुख्य मांगें रखीं, जिनमें हिरासत में लिए गए किसानों की तत्काल रिहाई और एथेनॉल फैक्टरी के निर्माण को पूरी तरह रोकना शामिल है। वार्ता में सहमति बनी कि बुधवार को जिला कलेक्टर के साथ बैठक कर इन मांगों पर चर्चा की जाएगी। किसान नेताओं ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना जारी रहेगा।
किसानों की चिंताएं बरकरार, प्रशासन शांति बनाए रखने का प्रयास
किसानों का कहना है कि फैक्टरी से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण से न केवल उनकी फसलें प्रभावित होंगी, बल्कि पूरे क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा। प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है और अतिरिक्त फोर्स की तैनाती को उचित ठहराया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन किसानों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा।