हनुमानगढ़ जिले के पल्लू कस्बे स्थित एसबीआई शाखा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बड़े स्तर पर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। शुक्रवार को कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा अचानक शाखा पहुंचे और रिकॉर्ड की जांच शुरू की। इस दौरान करीब 9 करोड़ रुपये के संदिग्ध बीमा क्लेम का खुलासा हुआ। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद यह राशि जारी होने से पहले रोक दी गई।
शाखा पहुंचते ही कृषि मंत्री ने बैंक अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली और संबंधित दस्तावेज तलब किए। लंबे समय तक शाखा में रिकॉर्ड खंगाले गए, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
162 बाहरी लोगों के नाम पर बीमा कराने का आरोप
प्राथमिक जांच में सामने आया कि 162 बाहरी व्यक्तियों के बचत खाते खोलकर उन्हें बैंक रिकॉर्ड में “ऋणी किसान” दर्शाया गया। इसके बाद खरीफ 2025 के लिए मूंगफली फसल का बीमा करवाया गया। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी खसरा नंबर, मुरब्बा नंबर और कृषि भूमि रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया।
मंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिन लोगों के नाम पर फसल बीमा किया गया, उनमें से कई लोगों का पल्लू क्षेत्र से कोई संबंध नहीं है। कुछ नाम बीकानेर जिले से जुड़े बताए गए हैं, जबकि कुछ लोगों के दूसरे राज्यों के होने की जानकारी भी सामने आई है।
तहसील प्रशासन की रिपोर्ट में भी सामने आई अनियमितताएं
गजनेर तहसील प्रशासन की रिपोर्ट में भी गंभीर गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि सूची में शामिल व्यक्तियों के नाम पर संबंधित गांवों में कोई भूमि दर्ज नहीं है। साथ ही प्रस्तुत किए गए खसरा और मुरब्बा नंबर भी फर्जी पाए गए हैं।
इन खुलासों के बाद पूरे मामले में किसी संगठित नेटवर्क की आशंका गहरा गई है। जांच एजेंसियां अब बैंकिंग, कृषि और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं।
बैंक रिकॉर्ड में नहीं मिली जमाबंदी
जांच के दौरान सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि कई तथाकथित किसानों की जमाबंदी तक बैंक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं थी। इसके बावजूद उन्हें ऋणी किसान मानते हुए फसल बीमा प्रक्रिया पूरी कर दी गई। इस पर कृषि मंत्री ने बैंक प्रबंधन से सीधे सवाल किए।
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सूत्रों के अनुसार कृषि मंत्री ने शाखा प्रबंधक अंकुश मिगलानी से पूछा कि क्या संबंधित लोगों का बीमा इसी शाखा से किया गया और क्या वे वास्तव में ऋणी किसान हैं। शाखा प्रबंधन ने बीमा होने की पुष्टि की, लेकिन भूमि रिकॉर्ड और जमाबंदी प्रस्तुत नहीं कर सका।
दोषियों पर एफआईआर और खातों को फ्रीज करने की तैयारी
किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के हित में बनाई गई है, लेकिन कुछ लोग इसे कथित रूप से लूट का माध्यम बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामले में दोषी पाए जाने वाले शाखा प्रबंधक, बैंक कर्मियों, कथित फर्जी किसानों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे।
उन्होंने यह भी संकेत दिए कि संदिग्ध खातों को फ्रीज किया जाएगा, राजस्व रिकॉर्ड की विस्तृत जांच होगी और बीमा कंपनी अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।
बैंक मैनेजर ने आईडी-पासवर्ड दुरुपयोग की बात कही
उधर, बैंक मैनेजर ने खुद को मामले से अलग बताते हुए दावा किया कि शाखा में काम करने वाले कुछ युवकों ने उनकी आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग किया। उनके अनुसार पूरी प्रक्रिया बाहर बैठकर संचालित की गई। बैंक प्रबंधन की ओर से इस संबंध में पुलिस को परिवाद भी सौंपा गया है।
हालांकि कृषि मंत्री ने इस दलील पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी का पासवर्ड इतनी आसानी से इस्तेमाल हो सकता है, तो यह बैंक खातों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने संकेत दिए कि जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा।