राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन चौथे दिन भी जारी है। गुर्जर समुदाय के लोग रेल पटरियों पर कब्जा जमाए बैठे हुए हैं। सवाई माधोपुर के मलारना रेलवे स्टेशन के पास मकसूदनपुरा गांव से शुरू हुआ गुर्जर आंदोलन राजस्थान के कई जिलों में फैल चुका है।
अब ये आंदोलन हिंसक भी होता जा रहा है जिसके चलते धारा 144 लगा दी गई है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला लगातार बयान दे रहे हैं।
अपनी बात पर अड़े बैंसला
गुर्जर नेता विजय बैंसला ने सोमवार को एक बार फिर दोहराया कि सरकार को वार्ता के लिए मलारना डूंगर में रेल पटरी पर ही आना होगा और आंदोलनकारी वार्ता के लिए कहीं नहीं जाएंगे। कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला व पूरी टीम बैठकर फैसला करेंगे।
बैंसला ने कहा कि बातचीत क्या करनी है? सरकार पांच प्रतिशत आरक्षण की हमारी मांग पूरी करे और हम घर चले जाएंगे। यह मेरा व्यक्तिगत अनुरोध है, राजस्थान के लोगों को भड़काने के लिए कुछ भी नहीं करना चाहिए, लोग मेरे निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। इसे पहले जितना शांतिपूर्ण तरीके से हल करें उतना बेहतर होगा।
कई ट्रेनें रद्द
राजस्थान में गुर्जर नेता मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर पटरियों पर बैठे हैं जिसके चलते कई प्रमुख ट्रेन रद्द कर दी गयी हैं या उनके मार्ग में बदलाव किया गया है। राज्य में कई सड़क मार्ग भी बंद हैं। चार ट्रेनों को डायवर्ट किया गया है, एक को आज गुर्जर आरक्षण आंदोलन के कारण रद्द कर दिया गया है। 12 फरवरी की भी एक ट्रेन को रद्द किया गया है।
वहीं पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) एम एल लाठर ने बताया कि आंदोलन के दौरान कहीं से अप्रिय घटना का कोई समाचार नहीं है। रविवार को कुछ हुड़दंगियों ने धौलपुर में पुलिस के तीन वाहनों को आग के हवाले कर दिया था और हवा में गोलियां चलाईं थीं।
लाठर ने बताया कि आंदोलनकारियों ने दौसा जिले में सिकंदरा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 11 को अवरूद्ध कर दिया है। इसके साथ ही नैनवा (बूंदी), बुंडला (करौली) व मलारना में भी सड़क मार्ग अवरूद्ध है।
5 फीसदी आरक्षण की मांग
उल्लेखनीय है कि गुर्जर नेता राज्य में सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर शुक्रवार शाम को सवाईमाधोपुर के मलारना डूंगर में रेल पटरी पर बैठ गए। गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला व उनके समर्थक यहीं जमे हैं।
आंदोलनकारियों और सरकारी प्रतिमंडल में शनिवार को हुई बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद रविवार को दोनों पक्षों में कोई बातचीत नहीं हुई।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को कहा कि सरकार के स्तर पर वार्ता के द्वार खुले हैं और आंदोलनकारियों को बातचीत के लिए आगे आना चाहिए।
गुर्जर समाज सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए गुर्जर, रायका रेबारी, गडिया, लुहार, बंजारा और गड़रिया समाज के लोगों को पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहा है। वर्तमान में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के अतिरिक्त 50 प्रतिशत की कानूनी सीमा में गुर्जरों को अति पिछड़ा श्रेणी के तहत एक प्रतिशत आरक्षण अलग से मिल रहा है।