राजस्थान की वसुंधरा सरकार में मंत्री रहे घनश्याम तिवारी की दो साल बाद भाजपा में शनिवार को घर वापसी हो गई। भाजपा मुख्यालय पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने उन्हें भाजपा की सदस्यता दिलाई।
2019 में लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले करने वाले तिवारी वसुंधरा राजे के घोर विरोधी रहे हैं। राजे के विरोध के चलते ही उन्होंने न केवल भाजपा का दामन छोड़ा, बल्कि अपनी नई पार्टी भारतवाहिनी बनाई थी।
इसी पार्टी से उन्होंने साल 2018 में सांगानेर विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था, लेकिन वे अपनी जमानत तक नहीं बचा सके थे। भाजपा में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत में तिवारी ने कहा, मैंने कभी भी कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण ही नहीं की। मेरे मन में हमेशा से भाजपा ही रही है। मैं शुरू से ही संघ से जुड़ा रहा हूं।
वहीं, वसुंधरा के विरोध से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि उस समय जो भी मुद्दे थे वह सेटल हो चुके हैं। तिवारी ने यह भी कहा कि उनका चुनाव लड़ने का अभी कोई इरादा नहीं है। वह पार्टी के लिए काम करना चाहते हैं।